गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी का 56वां स्थापना दिवस श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित होगा


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अमृतसरः गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के 56वें स्थापना दिवस को मनाने के संबंध में आज विशेष बैठक हुई। यूनिवर्सिटी के जिस्ट्रार डॉ. के.एस. चहल ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. करमजीत सिंह के नेतृत्व में 24 नवंबर 2025 को यूनिवर्सिटी के 56वें ​​स्थापना दिवस को धार्मिक एवं शैक्षणिक भव्यता के साथ मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस बार स्थापना दिवस श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित होगा।

रजिस्ट्रार डॉ. चहल ने कहा कि 1969 में स्थापित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर शिक्षा, अनुसंधान और पंजाबी संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान डाला है।

उन्होंने बताया कि वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के नेतृत्व में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने विभागाध्यक्षों और अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी कार्यक्रमों की समीक्षा की। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. के.एस. चहल ने विभिन्न समितियों द्वारा की गई तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।

डॉ. चहल ने बताया कि समारोह में भाग लेने के लिए छात्रों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों, सामाजिक संगठनों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं।

मुख्य कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में आयोजित होगा, जहां तीन प्रख्यात विद्वान अकादमिक व्याख्यान देंगे। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने वाली एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

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कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने कहा, “यह स्थापना दिवस न केवल विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक अवसर भी है। जीएनडीयू छात्रों में नवाचार, नैतिकता और सेवा की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।”

कुलसचिव डॉ. चहल ने कहा कि 56वां स्थापना दिवस आस्था, शिक्षा और अनुसंधान के संगम का प्रतीक होगा और गुरु तेग बहादुर साहिब जी के चरणों में श्रद्धांजलि के रूप में एक नई शुरुआत का प्रतीक होगा।

डॉ. के.एस. चहल ने आगे बताया कि 24 नवंबर को सुबह 8 बजे श्री अखंड पाठ साहिब का भोग डाला जाएगा, जिसके बाद श्री हरमंदिर साहिब से आए हज़ूरी रागी जत्थे और विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा कीर्तन किया जाएगा।
सुबह 11 बजे, श्री गुरु ग्रंथ साहिब सभागार में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के पूर्व प्रोफेसर डॉ. बृजपाल सिंह, पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पूर्व प्रोफेसर डॉ. केहर सिंह और इंडोनेशिया की पीटीईएसएसए इंडस्ट्रीज के बिजनेस डेवलपमेंट एवं प्रोजेक्ट हेड इंजीनियर सुप्रीत पाल सिंह द्वारा शैक्षणिक व्याख्यान दिए जाएंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष की चित्रकला प्रतियोगिता, जिसका विषय “तटों के पार जल का स्वरूप” है, पंजाब के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित है। इस अवसर पर एक पुस्तक प्रदर्शनी और लोक कला प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएँगे, जिसमें विश्वविद्यालय के प्रकाशनों पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी।

डॉ. चहल ने बताया कि इंडोर स्टेडियम के सामने दोपहर 1 बजे से गुरु का लंगर निरंतर चलेगा। शाम 7 से 8 बजे तक गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन दरबार का आयोजन होगा, जिसके बाद लंगर के रूप में दूध और जलेबी का वितरण किया जाएगा।

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