
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
जब-जब किसी राज्य में विधानसभा चुनाव या देश में लोकसभा चुनाव आते हैं उससे कुछ समय पहले भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने लगते हैं। कभी किसी विधायक का नाम तो कभी किसी मंत्री तथा कभी अफसरों के नामों का खुलासा होता है।
वैसे भ्रष्टाचार किसी एक राज्य या देश की समस्या नहीं है। लगभग सभी देश भ्रष्टाचार की दलदल में फंसे हैं और जनता बेहाल है।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2024 में 180 देशों में से भारत 96वें स्थान पर। सुधार के नाम पर कानून बनाए जाते हैं और इन्हीं कानूनों की आड़ में भ्रष्टाचार किया जाता है।
पिछले महीने नगर निगम के एक अफसर को विजीलेंस द्वारा उठाए जाने के बाद विधायक रमन अरोड़ा को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उनके करीबियों पर शिकंजा कसा जाने लगा। विधायक का बेटा और रिश्तेदार जमानत के लिए अर्जियां लगा रहे हैं और व्यापारी महेश सुखीजा भी इसी सिलसिले में जेल में हैं। अफसर और विधायक तो भ्रष्टाचार के कारण जेल में हैं ही, व्यापारी भी इस केस में फंस गया। वहीं गत वर्ष जालंधर के वेस्ट हलके में विधायक पद को लेकर चुनाव हुए तो पूर्व विधायक शीतल अंगुराल भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होने लगे।
सवाल यह पैदा होता है कि क्या भ्रष्टाचार के हमाम में सिर्फ यही लोग नंगे हैं। नहीं किसी एक राजनीतिक पार्टी का नाम लेना ठीक नहीं है। भ्रष्टाचार के इस हमाम में नंगे ही नंगे हैं। कुछ एक उजागर हो जाते हैं और कुछ का नंबर बाद में आता है।
कुछ साल पहले पंजाब के कैबिनेट मंत्री और एक विधायक अपने ही प्राइवेट पीए और ओएसडी के साथ ऑडियो रिकार्डिंग के कारण भ्रष्टाचार के मामलों में फंस गए। बाद में मंत्री को क्लीन चिट मिल गई। आरोप साबित नहीं हो सके। मुख्यमंत्री को अपने मंत्रियों और विधायकों को आदेश जारी कर कहना पड़ा कि मंत्री विधायक अपने पीए साफ छवि वाले लगां।
वहीं दिल्ली की पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा केस दर्ज किया गया है।
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन में मंत्री संपातिया उड़के पर 1000 करोड़ के कमीशन की शिकायत करने जांच बैठाने वाले प्रमुख अभियंता संजय अंधवान खुद गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में घिर गए। इसका खुलासा 2005-2006 के एक मामले में उन पर हुई विभागीय कार्रवाई से हुआ।
गत माह राजस्थान के बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत हुई। एसीबी ने इस मामले में शिकायत का 7 बार सत्यापन किया। हर बार शिकायत सही पाई गई। सबूत इकट्ठा करने के लिए जाल बिछाया गया। काफी इंतजार करने के बाद आखिर में एसीबी की टीम ने विधायक के घर पर दबिश दी। विधायक के हाथ धुलवाने पर कलर आया लेकिन आवास की तलाशी लेने पर रुपए नहीं मिले। लेकिन एसीबी की टीम ने ट्रेप की इस कार्रवाई के दौरान नोटों की गड्डियों में जीपीएस सिस्टम लगा रखा था। लोकेशन ट्रेस करते हुए टीम वहीं पहुंची तो रुपए छिपाने वाले ने जीपीएस की चिप ही निकाल कर एक खाली प्लॉट में फेंक दी। बाद में आरोपियों से पूछताछ में नोटों को जमीन में छिपाने का पता चला।
मिजोरम में कांग्रेस के एकमात्र विधायक एवं मंत्री सी. न्गुनलियानचुंगा भ्रष्टाचार के केस में फंस चुके हैं।
महाराष्ट्र में 500 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में गत वर्ष शिवसेना उद्धव ठाकरे के विधायक रवींद्र वायकर के खिलाफ भाजपा के किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को शिकायत दी थी।
यही नहीं भ्रष्टाचार के आरोपों में आला नेताओं के खिलाफ आरोप लगते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह, पंजाब में पूर्व जंगलात मंत्री गिलजियां के खिलाफ भी घोटाले के आरोप लग चुके हैं। उत्तर प्रदेश में सीएम योगी के 3 मंत्रियों के निजी सचिव गिरफ्तार होकर जेल की हवा खा चुके हैं। अभी कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश में एक दीवार की पुताई में 168 मजदूरों ओर 65 राजमिस्त्रियों के लगने का खुलासा हुआ था। मामला भाजपा शासित मध्य प्रदेश के शाहडोल जिले में एक सरकारी हाई स्कूल की दीवार की पुताई का थे।
इसके अलावा भी राजनीतिक पार्टियों और अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। अदालतों में भ्रष्टाचार के मामलों की क्या सच्चाई सामने आती है यह तो बाद की बात है लेकिन भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
