
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
आलू बुखारे के सीजन है। कुछ लोग इसे अनदेखा कर देते हैं, लेकिन जब डॉक्टर आलू बुखारा खाने की सलाह देता है तो बाजार से सूखे आलू बुखारे लाकर खाते हैं। क्यों न आज तब मार्किट में ताजा फल उपलब्ध है तो इसका स्वाद चखा जाए और शरीर को तंदुरुस्त किया जाए।
दूसरी तरफ जो शूगर के मरीज हैं, डॉक्टर की सलाह पर बहुत ही सोच समझकर फल का एकाध स्लाइस लेंगे लेकिन आलू बुखारा एक ऐसा फल है जिसे शूगर के मरीज भी खा सकता हैं।
शूगर के मरीजों को आलू बुघारा क्यों खाना चाहिए इसके पीछे कारण है, विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन ए, विटामिन बी के अलावा पोटेशियम, कॉपर, मैंगजीत और फाइबर के मुख्य स्रोत के अलावा इसमें पाया जाने वाला एडोपोनेक्टिन (adiponectin) हार्मोन जोकि एडीपोज(फैट) द्वारा पैदा किया जाता है। एडोपोनेक्टिन इंसुलिन सेंस्टेविटी(संवेदनशीलत), सूजन और ऊर्जा चयापचय को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एडीपोनेक्टिन मांसपेशियों और यकृत के ऊतकों में इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाता है, जिसका अर्थ है कि ये ऊतक रक्त से ग्लूकोज लेने के लिए इंसुलिन के संकेत के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
इसके अलावा आलू बुखारे में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। स्वाद मीठा होने के बावजूद आला बुखारा शूगर को नियंत्रित रखात है।
इसके अलावा सूखा आलू बुखारा खाने के भी अनेक फायदे हैं। सूखा आलू बुखारा खाने से हड्डियां मजबूत होती है। हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है, जोकि आलू बुखारा में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
कब खाएं आलू बुखारा
आलू बुखारे को हम सुबह के नाश्ते में और शाम को किसी भी समय खाया जा सकता है।
ये रोगी कम खाएं आलू बुखारा
जो रोगी किडनी स्टोन की समस्या से पीड़ित हैं उन्हें आलू बुखारा खाने से परहेज करना चाहिए या कम मात्रा में खाना चाहिए। क्योंकि आलू बुखारा में ऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है, जो किडनी स्टोन खासकर कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन के खतरे को बढ़ा सकती है।
कुछ लोगों को आलू बुखारा से एलर्जी जैसी समस्या होती है। इसलिए ऐसे मरीज डॉक्टर की सलाह लेकर ही आलू बुखारा खाएं।