
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
सांस जीवन का आधार है। सांस के बिना जीवन संभव नहीं है। यह एक सरल, लेकिन गहरी बात है जो जीवन के महत्व को दर्शाती है।गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है।
फेफड़ों का स्वास्थ्य और हृदय का स्वास्थ्य एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है, फिर भी बहुत से लोग यह नहीं समझ पाते कि एक-दूसरे पर कितना प्रभाव पड़ता है।
हृदय और फेफड़े मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि शरीर की हर कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचे। जब फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो हृदय को उसकी भरपाई के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उच्च रक्तचाप, हृदय गति रुकना और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
योगाचार्य रजिंदर हंस ने साधकों को बताया कि योगा में फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मत्स्यासन बहुत ही कारगर है। मत्स्यासन संस्कृत के दो शब्दों से मिल बना है। मत्स्य मतलब मछली और आसन मतलब बैठने की मुद्रा। यह आसन फेफड़ों और छाती को फैलाता है, ऑक्सीजन का सेवन बढ़ाता है और श्वसन क्रिया में सुधार करता है।
इसके अलावा रीढ़ की हड्डी मजबूत होती। इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती और यह आसन पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, पाचन को बढ़ावा देता है और कब्ज से राहत देता है।
आसन करने की विधि
आसन को करने की विधि बताते हुए रजिंदर हंस के साथ इशमीन और अंजली ने साधकों को बताया कि सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं, पैरों को एक साथ रखें और हाथों को बगल में रखें।
इसके बाद अपने हाथों को अपने कूल्हों के नीचे सरकाएं, हथेलियां नीचे की ओर हों। अपनी कोहनियों को अपने शरीर के पास लाएं। अपनी टांगों को ऊपर दिए दर्शाई की मुद्रा अनुसार रखें।
श्वास लें, अपनी कोहनियों और अग्रभुजाओं को फर्श पर दबाएं और अपनी छाती को छत की ओर ऊपर उठाएं।
सिर को पीछे की ओर झुकाएं, जिससे आपके सिर का शीर्ष भाग फर्श पर रहे।
कुछ देर तक गहरी सांस लेते हुए इसी मुद्रा में रहें, फिर अपनी छाती को नीचे लाते हुए फर्श पर वापस आ जाएं।
गर्दन, पेट और जांघों को मजबूत बनाता मत्स्यासन
भागदौड़ के जीवन में अत्यधिक कार्यभार के कारण गर्दन और कंधों में दर्द होना स्वाभाविक है। मत्स्यासन में पीठ को तानकर लेटने से आपकी गर्दन की मांसपेशियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इसके अलावा, आपके पेट और जांघों की मांसपेशियों में रक्त संचार बेहतर होने से सुधार होता है।
इसके अलावा, यह योगासन आपको सही आकार बनाए रखने और इन क्षेत्रों में दर्द से बचने में मदद करेगा।
