यूरिक एसिड से परेशान हैं तो शुरू कर दें कच्चा पपीता खाना


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लाइफस्टाइल बदलने के साथ ही हमारा खानपान भी बदल गया है। वर्कआउट कम हो गया है और सेहत के लिए क्या सही है इसकी पहचान नहीं होने के कारण जो हाथ लगा खा लिया। जिस कारण यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे लोगों की गिनती लगातार बढ़ती जा रही है।

हाथों पैरों की अंगुलियों में दर्द, जोड़ों में क्रिस्टल जमने के कारण कट-कट की आवाज आना। उठने बैठने में तकलीफ आदि समस्या का सामना करना पड़ता है। वैसे तो यूरिक एसिड के लिए कई दवाइयां मौजूद है लेकिन कोई भी दवा लंबे समय तक कारगर साबित नहीं होती। दर्द निवारक दवाइयां खाने से शरीर पर दवाइयों के साइड इफैक्ट काफी पड़ते हैं। सबसे उत्तम इलाज तो अपने खान-पान पर ध्यान देना ही कारगर है लेकिन क्या खाया जाए यह जानना बहुत जरूरी है।

छिलके वाली दालें और पालक, पनीर, सोयाबीन इत्यादि न खाया जाए की सलाह दी जाती है और ज्यादा से ज्यादा फल खाने को कहा जाता है। वैसे तो लगभग सभी फलों में एंटीऑक्सीडेंट्स गुण पाये जाते हैं लेकिन यदि कच्चा पपीता खाया जाए तो यूरिक एसिड को कम करने के लिय यह एक रामबाण फल है।

कच्चा पपीता पाचन क्रिया को सुधारने, कब्ज, गैस और सूजन से राहत दिलाने के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन-सी से भरपूर होता है जो त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद है। यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और हृदय रोग व कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी सहायक है लेकिन इसमें पाया जाने वाले एक खास तत्व papain(पपेन) यूरिक एसिड में बहुत कारगर साबित होता है।

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पपेन एक शक्तिशाली प्रोटियोलिटिक एंजाइम है जो पपीते के पौधे (कैरिका पपाया) की पत्तियों, फलों, जड़ों और दूधिया लेटेक्स में पाया जाता है। सिस्टीन प्रोटीएज़ के रूप में, यह प्रोटीन अणुओं को छोटी पेप्टाइड श्रृंखलाओं और अमीनो अम्लों में तोड़कर काम करता है।  

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पपीते में मौजूद एंजाइम पपेन, प्रोटीन को तोड़ने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। रिपोर्ट के अनुसार, “पपेन न केवल पाचन में मदद करता है, बल्कि यूरिक एसिड को तोड़ने और खत्म करने में भी मदद करता है।” हाई यूरिक एसिड स्तर से जूझ रहे लोगों के लिए कच्चा पपीता विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है। यह जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत देता है और अपनी क्षारीय प्रकृति के कारण यूरिक एसिड क्रिस्टल को धीरे-धीरे घुलने में मदद करता है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक कच्चा पपीता सब्जी के रूप में खाया जा सकता है और कम से कम तीन महीने तक इसका सेवन करना चाहिए।

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