
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को ‘मन की बात’ के 127वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में प्लास्टिक कचरे के बदले भोजन देने वाले ‘गार्बेज कैफे’ की बात कही। जी हां स्वच्छ भारत की सोच को सच करने के लिए अंबिकापुर नगर निगम ने वर्ष 2019 में गार्बेज कैफे की शुरुआत की। इस शुरुआत से पर्यावरण तो स्वच्छ हुआ ही, साथ में बहुत से लोगों को भर पेट खाना भी मिला।
गार्बेज कैफे में आधा किलो प्लास्टिक कचरा देने पर सुबह नाश्ता और एक किलो प्लास्टिक कचरा देने पर भर पेट भोजन दिया जाता है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा और उनकी टीम द्वारा 40 कुओं और 6 झीलों का जीर्णोद्धार करने का जिक्र किया।
वहीं प्रधानमंत्री ने कहा गुजरात के वन विभाग ने Mangrove के इस महत्व को समझते हुए खास मुहिम चलाई हुई है। 5 साल पहले वन विभाग की टीमों ने अहमदाबाद के नजदीक धोलेरा में Mangrove लगाने का काम शुरू किया था, और आज, धोलेरा तट पर साढ़े तीन हजार हेक्टेयर में Mangrove फैल चुके हैं। इन Mangrove का असर आज पूरे क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।
वहाँ के eco system में dolphins की संख्या बढ़ गई है। केकड़े और दूसरे जलीय जीव भी पहले से ज्यादा हो गए हैं। यही नहीं, अब यहाँ प्रवासी पक्षी भी काफी संख्या में आ रहे हैं। इससे वहाँ के पर्यावरण पर अच्छा प्रभाव तो पड़ा ही है, धोलेरा के मछली पालकों को भी फायदा हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय कुत्तों की नस्लों, उनके प्रशिक्षण और सुरक्षा बलों में उनकी भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बीएसएफ और सीआरपीएफ द्वारा देशी कुत्तों को प्रशिक्षित करने और उनके नामों में भारतीयता बनाए रखने की प्रशंसा की। इसके अलावा, उन्होंने 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने भारतीय कॉफी, विशेषकर ओडिशा की कोरापुट कॉफी और देश के अन्य हिस्सों में कॉफी की विविधता और उसके लाभ पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की कॉफी अब विश्व स्तर पर पहचान बना रही है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष और इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ मातृभूमि के प्रति हमारे कर्तव्यों और देशभक्ति की भावना जगाता है। उन्होंने देशवासियों से इस अवसर को यादगार बनाने के लिए सुझाव भेजने का अनुरोध किया।
साथ ही, उन्होंने संस्कृत भाषा और युवा पीढ़ी द्वारा संस्कृत में किए जा रहे रोचक कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाषा किसी सभ्यता के मूल्यों और परंपराओं का वाहक होती है और युवा इसे पुनर्जीवित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आदिवासी नायकों, कोमराम भीम और भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद करते हुए युवा पीढ़ी से उनसे सीख लेने और उनके जीवन और कार्यों को जानने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों को अपने आस-पास के प्रेरक व्यक्तियों और समूहों के बारे में बताने का मौका मिलता है। उन्होंने सभी से ऐसे संदेश भेजने का अनुरोध किया और अगले महीने फिर नए विषयों के साथ ‘मन की बात’ में मिलने का वादा किया।