
चंडीगढ़:हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों से जुड़े करीब 597 करोड़ रुपए के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में ईडी की चंडीगढ़ जोनल टीम ने चंडीगढ़ ,मोहाली,पंचकूला, गुरुग्राम में एक साथ 19 ठिकानों पर छापेमारी की।
ईडी जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी धन को बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखने के बजा बिना अनुमति के इसे अलग-अलग खातों और फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया।
इस मामले में बैंक के पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार के ठिकानों के अलावा उनके परिवार के सदस्यों, कई शेल कंपनियों और कारोबारियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। जिन कंपनियों की जांच की गई उनमें स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने पहले स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नाम की एक शेल कंपनी बनाई और सरकारी धन को उसमें ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद इस रकम को ज्वैलर्स के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और फर्जी बिल बनाकर सोना खरीदने का दिखावा किया गया।
ईडी के अनुसार यह घोटाला करीब एक साल से चल रहा था और इसमें बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद ली गई। मुख्य आरोपी रिभव ऋषि ने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दे दिया था।जांच में यह भी सामने आया कि मोहाली के होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा के खातों में भी इस घोटाले का पैसा पहुंचा। छापेमारी के दौरान विक्रम वाधवा अपने ठिकाने पर नहीं मिला और फिलहाल उसे फरार बताया जा रहा
ईडी की टीम ने कार्रवाई के दौरान 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। साथ ही कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।