
चंडीगढ़ : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ सिविल प्रशासन अधिकारियों पर जुर्माना लगाने का आदेश तीन करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाले पंजाब के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के पंजाब उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि पंजाब में कानून का पालन नहीं हो रहा है। राजनीतिक नेताओं को खुश किया जा रहा है और भगवंत मान सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए पुलिस और नागरिक प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है।
अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि अधिकारियों ने अदालत के आदेशों की “लगातार और जानबूझकर अवहेलना” की है। अदालत ने निर्देश दिया कि डीजीपी गौरव यादव, परिवहन विभाग के सचिव प्रदीप कुमार (आईएएस); राज्य परिवहन आयुक्त मनीष कुमार (आईएएस); और संगरूर के उपायुक्त जितेंद्र जोरवाल (आईएएस) के वेतन से समान रूप से ₹2 लाख का जुर्माना वसूला जाए। यह राशि पंजाब के मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि यह जुर्माना नियमों का पालन न करने पर इन अधिकारियों पर पहले लगाए गए ₹1 लाख के जुर्माने के अतिरिक्त है।
भाजपा नेता परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि वरिष्ठ अधिकारी अदालत के निर्देशों के प्रति उदासीनता दिखा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि पंजाब के लोगों को न्याय दिलाने में उनकी क्या भूमिका होगी। हाईकोर्ट द्वारा कई अवसर दिए जाने के बावजूद, अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत अवैध रूप से संशोधित वाहनों को हटाने के संबंध में संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफल रहे।
अदालत ने आगे कहा कि यह आचरण न्यायिक निर्देशों के प्रति लापरवाही और टाल-मटोल को दर्शाता है। पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता परमजीत कैंथ ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी अधिकारी कानून के अनुसार कार्य करें और अदालती आदेशों का पालन करें। उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और अदालती आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।