
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
पंजाब भारत के अन्न भंडारण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसके कारण पंजाब को ‘भारत का अन्न भंडार’ भी कहा जाता है। पंजाब प्रति इकाई क्षेत्र में सबसे अधिक गेहूं और चावल का उत्पादन करता है और केंद्रीय पूल के लिए कुल अनाज खरीद में एक बड़ा योगदान देता है।
वर्ष 2024-25 में पंजाब ने केंद्रीय पूल में रिकार्ड 45 प्रतिशत गेहूं का योगदान दिया लेकिन इस साल अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बारिश और भाखड़ा डैम, पौंग डैम और रणजीत सागर डैम से छोड़े गए पानी ने पंजाब में इतनी तबाही मचाई है कि देश के सामने अनाज संकट पैदा होने की स्थिति पैदा हो गई है। बारिश के कारण चार लाख एकड़ रकबे में धान की फसल का नुक्सान हुआ है।
भले ही सरकार की तरफ से गिरदावरी करवाई जा रही है लेकिन किसानों के इस बारिश और डैमों से छोड़े गए पानी के कारण जो तबाही हुई है उसकी पूरी भरपाई कर पाना अकेले पंजाब सरकार के वश की बात नहीं है, इसके लिए केंद्र सरकार को पंजाब के लिए विशेष पैकेज की घोषणा किए जाने की तबाही है।
आज स्थिति यह पैदा हो गई है कि जो किसान देश ही नहीं विदेशों में बैठे लोगों का पेट भरता है आज उनके सामने अपना पेट पालने की सोच खड़ी हो गई है।
पंजाब में खड़ा होने वाले अन्न संकट को देखते हुए अनेक नेता, मंत्री, विधायक तथा पंजाब सरकार केंद्र सरकार से आस लगाए हुए हैं। हालांकि केंद्र सरकार जो हर तरफ पल-पल नजर रखती है उसे पंजाब की मौजूदा स्थिति के बारे में अवगत करवाना सूर्य को दीया दिखाने के बराबर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जोकि स्वयं पंजाब की स्थिति को लेकर चिंतित हैं मुख्यमंत्री भगवंत मान को फोन कर प्रदेश की स्थिति के बारे में पूछ चुके हैं। फिर भी केंद्र सरकार को किसानों की दशा को देखते हुए और आने वाले दिनों में पैदा होने वाले अन्न संकट को देखते हुए सरकार का खजाना खोलने की आवश्यकता है।