
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
जालंधर सेट्रल हलके से विधायक रमन अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद से ही यह क्यास लगाए जा रहे हैं कि क्या सेंट्रल हलका जालंधर में उप चुनाव होने जा रहे हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से सेंट्रल हलके से कारोबारी नितिन कोहली को हलका सेंट्रल का तभी इंचार्ज लगा दिया गया था जब विधायक रमन अरोड़ा की गिरफ्तारी हुई थी।
आम आदमी पार्टी सत्ता में है और रमन अरोड़ा आम आदमी पार्टी से विधायक हैं। भ्रष्टाचार के मामले में विजीलेंस द्वारा नगर निगम के एटीपी संदीप वशिष्ठ को गिरफ्तार किए जाने के कुछ दिन बाद ही विधायक रमन अरोड़ा को भी विजीलेंस ने गिरफ्तार कर लिया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पार्टी की लीडरशिप द्वारा इस विचार के बाद कि विधायक की गिरफ्तार के बाद हलके की जनता को किसी प्रकार की समस्या पेश नहीं आनी चाहिए इसलिए कारोबारी नितिन कोहली को हलका इंचार्ज लगा दिया गया था।
सौ दिन से ज्यादा हो गए हो गए हैं हलका इंचार्ज नितिन कोहली को हलके में गर्मजोशी के साथ जनता की सेवा करते हुए। जब से नितिन कोहली ने हलके की कमान संभाली है लोगों की समस्याएं मौके पर हल हो रही हैं। जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्र्स्ट से ट्रस्ट की कालोनियों में प्लाटों पर लगाए जाने वाले एन्हांसमेंट फीस या फिर नॉन कंस्ट्रक्शन फीस के मामले हल करवाने से महाराजा रणजीत सिंह नगर, सूर्या एन्क्लेव, गुरु गोबिंद सिंह एवेन्यू सहित जालंधर की अनेक ऐसी कॉलोनियों के निवासियों को बड़ी राहत मिली।
इसके बाद नितिन कोहली द्वारा फिट सेंट्रल के तहत भी अनेक पार्कों में वेडमिंटन कोर्ट और वॉलीबाल कोर्ट शुरू करवाए गए हैं कुछ का काम चल रहा है तथा कुछ का काम पूरा हो गया है।
जहां तक सेंट्रल हलके से आम आदमी पार्टी विधायक रमन अरोड़ा जोकि भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जेल जा चुके हैं और जमानत मिलने के साथ ही उनके खिलाफ थाना रामा मंडी में एक और पर्चा दर्ज होने के कारण उनकी दोबारा गिरफ्तार हो गई है और आज फिर अदालत में पेश किए जाने के बाद अदालत ने रमन अरोड़ा का रिमांड और बढ़ा दिया है। विधायक रमन अरोड़ा के बार-बार गिरफ्तार होने पर एक बार फिर शहर में चर्चा छिड़ गई है कि क्या सेंट्रल हलके में उप चुनाव होने जा रहे हैं।
फिलहाल अभी विधायक रमन अरोड़ा ने इस्तीफा नहीं दिया है और न ही इस्तीफा देने के बारे में कुछ बोल रहे हैं। दूसरी तरफ पंजाब विधानसभा चुनावों को भी मात्र एक साल करीब पांच महीने का समय ही बचा है। अगर रमन अरोड़ा इस्तीफा दे भी देते हैं तो कोई भी उम्मीदवार करीब सवा साल के लिए विधायक बनने के लिए चुनाव मैदान में उतरने को तैयार नहीं होगा
इसका कारण है कि चुनाव चाहे सवा साल के लिए हो या पांच साल के लिए नेताओं को करोड़ों रुपए चुनाव में पानी की तरह बहाने पड़ते हैं।