
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देश को मन की बात में संबोधित करते हुए साल 2025 में आप्रेशन सिंदूर से लेकर खेल और विज्ञान सहित अन्य क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियां गिनाते हुए गर्व जताया। पीएम ने कहा कुछ ही दिनों में साल 2026 दस्तक देने वाला है, और आज, जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, तो मन में पूरे एक साल की यादें घूम रही हैं – कई तस्वीरें, कई चर्चाएं, कई उपलब्धियां, जिन्होंने देश को एक साथ जोड़ दिया। 2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए जिन पर हर भारतीय को गर्व हुआ।
देश की सुरक्षा से लेकर खेल के मैदान तक, विज्ञान की प्रयोगशालाओं से लेकर दुनिया के बड़े मंचों तक। भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी। इस साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बन गया। दुनिया ने साफ देखा आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देश के कोने-कोने से मां भारती के प्रति प्रेम और समर्पण की तस्वीरें सामने आई। लोगों ने अपने-अपने तरीके से अपने भाव व्यक्त किये।
यही जज्बा तब भी देखने को मिला, जब ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हुए। मैंने आपसे आग्रह किया था कि ‘#VandeMataram150’ के साथ अपने संदेश और सुझाव भेजें। देशवासियों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
खेलों में देश की उपलब्धियों पर बोले पीएम
2025 खेल के लिहाज़ से भी एक यादगार साल रहा। हमारी पुरुष Cricket team ने ICC Champions Trophy जीती। महिला Cricket team ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया। भारत की बेटियों ने Women’s Blind T20 World Cup जीतकर इतिहास रच दिया। एशिया कप T20 में भी तिरंगा शान से लहराया। पैरा एथलीटों ने विश्व Championship में कई पदक जीतकर ये साबित किया कि कोई बाधा हौंसलों को नहीं रोक सकती।
विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई। शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय बने, जो International Space Station तक पहुंचे। पर्यावरण संरक्षण और वन्य-जीवों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रयास भी 2025 की पहचान बने। भारत में चीतों की संख्या भी अब 30 से ज्यादा हो गई है। 2025 में आस्था, संस्कृति और भारत की अद्वितीय विरासत सब एक साथ दिखाई दी। साल के शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ के आयोजन ने पूरी दुनिया को चकित किया। साल के अंत में अयोध्या में राम मंदिर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। स्वदेशी को लेकर भी लोगों का उत्साह खूब दिखाई दिया। लोग वही सामान खरीद रहे हैं, जिसमें किसी भारतीय का पसीना लगा हो और जिसमें भारत की मिट्टी की सुगंध हो। आज हम गर्व से कह सकते हैं 2025 ने भारत को और अधिक आत्मविश्वास दिया है। ये बात भी सही है इस वर्ष प्राकृतिक आपदाएं हमें झेलनी पड़ी, अनेक क्षेत्रों में झेलनी पड़ी। अब देश 2026 में नई उम्मीदों, नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
युवाओं में हमेशा कुछ नया करना का जुनून
भारत के युवाओं में हमेशा कुछ नया करने का जुनून है और वो उतने ही जागरूक भी हैं। मेरे युवा साथी कई बार मुझसे यह पूछते हैं कि nation building में वो अपना योगदान और कैसे बढ़ाएं? वो कैसे अपने ideas share कर सकते हैं। कई साथी पूछते हैं कि मेरे सामने वो अपने ideas का presentation कैसे दे सकते हैं? हमारे युवा साथियों की इस जिज्ञासा का समाधान है ‘Viksit Bharat Young Leaders Dialogue’।
पिछले साल इसका पहला edition हुआ था, अब कुछ दिन बाद उसका दूसरा edition होने वाला है। अगले महीने की 12 तारीख को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाया जाएगा। इसी दिन ‘Young Leaders Dialogue’ का भी आयोजन होगा और मैं भी इसमें जरूर शामिल होऊंगा। इसमें हमारे युवा Innovation, Fitness, Startup और Agriculture जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने ideas share करेंगे। मैं इस कार्यक्रम को लेकर बहुत ही उत्सुक हूँ।
‘Smart India Hackathon 2025’
‘Smart India Hackathon 2025’ का समापन इसी महीने हुआ है। इस Hackathon के दौरान 80 से अधिक सरकारी विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर students ने काम किया। Students ने ऐसे solution दिए, जो real life challenges से जुड़े थे। जैसे traffic की समस्या है। इसे लेकर युवाओं ने ‘Smart Traffic Management’ से जुड़े बहुत ही interesting perspective share किए। Financial Frauds और Digital Arrests जैसी चुनौतियों के समाधान पर भी युवाओं ने अपने ideas सामने रखे। गाँवों में digital banking के लिए Cyber Security Framework पर सुझाव दिया। कई युवा agriculture sector की चुनौतियों के समाधान में जुटे रहे। साथियो, पिछले 7-8 साल में ‘Smart India Hackathon’ में, 13 लाख से ज्यादा students और 6 हजार से ज्यादा Institutes हिस्सा ले चुके हैं। युवाओं ने सैंकड़ों problems के सटीक solutions भी दिए हैं। इस तरह के Hackathons का आयोजन समय-समय पर होता रहता है। मेरा अपने युवा साथियों से आग्रह है कि वे इन Hackathons का हिस्सा जरूर बनें।
बदलाव का समय कम हुआ
आज का जीवन Tech-Driven होता जा रहा है और जो परिवर्तन सदियों में आते थे वो बदलाव हम कुछ बरसों में होते देख रहे हैं। कई बार तो कुछ लोग चिंता जताते हैं कि Robots कहीं मनुष्यों को ही न Replace कर दें। ऐसे बदलते समय में Human Development के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है। मुझे ये देखकर बहुत खुशी होती है कि हमारी अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को अच्छी तरह थाम रही है – नई सोच के साथ नए तरीकों के साथ।
गीतांजलि आईआईएससी
आपने Indian Institute of Science उसका नाम तो जरूर सुना होगा। Research और Innovation इस संस्थान की पहचान है। कुछ साल पहले वहाँ के कुछ छात्रों ने महसूस किया कि पढ़ाई और Research के बीच संगीत के लिए भी जगह होनी चाहिए। बस यहीं से एक छोटी-सी Music Class शुरू हुई। ना बड़ा मंच, ना कोई बड़ा बजट। धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज इसे हम ‘Geetanjali IISc’ के नाम से जानते हैं। यह अब सिर्फ एक Class नहीं, Campus का सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत है, लोक परंपराएँ हैं, शास्त्रीय विधाएं हैं, छात्र यहाँ साथ बैठकर रियाज़ करते हैं। Professor साथ बैठते हैं, उनके परिवार भी जुड़ते हैं। आज दो-सौ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं। और खास बात ये कि जो विदेश चले गए, वो भी Online जुड़कर इस Group की डोर थामे हुए हैं।
मणिपुर के एक युवा मोइरांगथेम सेठ
एक पुरानी कहावत है ‘जहां चाह, वहाँ राह’। इस कहावत को फिर से सच कर दिखाया है मणिपुर के एक युवा मोइरांगथेम सेठ जी ने। उनकी उम्र 40 साल से भी कम है। श्रीमान् मोइरांगथेम जी मणिपुर के जिस दूर-सुदूर क्षेत्र में रहते थे वहाँ बिजली की बड़ी समस्या थी। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने Local Solution पर जोर दिया और उन्हें ये Solution मिला Solar Power में। हमारे मणिपुर में वैसे भी Solar Energy पैदा करना आसान है। तो मोइरांगथेम जी ने Solar Panel लगाने का अभियान चलाया और इस अभियान की वजह से आज उनके क्षेत्र के सैकड़ों घरों में Solar Power पहुंच गई है। खास बात ये है कि उन्होंने Solar Power का उपयोग Health-Care और आजीविका को बेहतर बनाने के लिए किया है। आज उनके प्रयासों से मणिपुर में कई Health Centers को भी Solar Power मिल रही है। उनके इस काम से मणिपुर की नारी-शक्ति को भी बहुत लाभ मिला है। स्थानीय मछुआरों और कलाकारों को भी इससे मदद मिली है।
आज सरकार ‘PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ के तहत हर लाभार्थी परिवार को Solar Panel लगाने के लिए करीब-करीब 75 से 80 हजार रुपए दे रही है। मोइरांगथेम जी के ये प्रयास यूं तो व्यक्तिगत प्रयास हैं, लेकिन Solar Power से जुड़े हर अभियान को नई गति दे रहे हैं। मैं ‘मन की बात’ के माध्यम से उन्हें अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।
कश्मीर का एक गौरवशाली अतीत हमारे सामने आया
आइए अब जरा हम जम्मू-कश्मीर की तरफ चलते हैं। जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत, उसकी एक ऐसी गाथा साझा करना चाहता हूँ, जो आपको गर्व से भर देगी। जम्मू-कश्मीर के बारामूला में, जेहनपोरा नाम की एक जगह है। वहां लोग बरसों से कुछ ऊंचे-ऊंचे टीले देखते आ रहे थे। साधारण से टीले किसी को नहीं पता था कि ये क्या है? फिर एक दिन Archaeologist की नज़र इन पर पड़ी। जब उन्होंने इस इलाके को ध्यान से देखना शुरू किया, तो ये टीले कुछ अलग लगे। इसके बाद इन टीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया। ड्रोन के ज़रिए ऊपर से तस्वीरें ली गईं, ज़मीन की Mapping की गई। और फिर कुछ हैरान करने वाली बातें सामने आने लगी।
पता चला ये टीले प्राकृतिक नहीं हैं। ये इंसान द्वारा बनाई गई किसी बड़ी इमारत के अवशेष हैं। इसी दौरान एक और दिलचस्प कड़ी जुड़ी। कश्मीर से हजारों किलोमीटर दूर, फ़्रांस के एक Museum के Archives में एक पुराना, धुंधला सा चित्र मिला। बारामूला के उस चित्र में तीन बौद्ध स्तूप नजर आ रहे थे। यहीं से समय ने करवट ली और कश्मीर का एक गौरवशाली अतीत हमारे सामने आया। ये करीब दो हजार साल पुराना इतिहास है। कश्मीर के जेहनपोरा का ये बौद्ध परिसर हमें याद दिलाता है, कश्मीर का अतीत क्या था, उसकी पहचान कितनी समृद्ध थी।