
जालंधर : अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर रोज भड़क रहे हैं। टैरिफ को लेकर धमकी पर धमकी मिल रही है। 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर एक बार फिर और टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। इन धमकियों के पीछे अन्य कारणों के अलावा तेल का खेल है। तेल खरीदने के मामले में वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और उससे भी बड़ी बात भारत को इस समय सस्ता तेल मिलना।
हालांकि अमरीका और ईयू खुद रूस से अपनी आपूर्ति के लिए वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार कर रहे हैं लेकिन भारत पर प्रतिबंध लगाकर भारत की अर्थव्यवस्था के मामले में बढ़ रही ताकत को रोकना चाहते हैं। अर्थ व्यवस्था के मामले में वर्तमान में जापान को पीछे छोड़कर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है।
अमरीका और ईयू के रूस के साथ व्यापारिक संबंध
2024 में यूरोपीय संघ का रूस के साथ वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 67.5 अरब यूरो था। इसके अलावा, 2023 में सेवाओं का व्यापार 17.2 अरब यूरो होने का अनुमान है।
2024 में यूरोपीय एलएनजी (LNG) का आयात रिकॉर्ड 16.5 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो 2022 के 15.21 मिलियन टन के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया। यूरोप-रूस व्यापार में न केवल ऊर्जा, बल्कि उर्वरक, खनन उत्पाद, रसायन, लोहा और इस्पात, और मशीनरी एवं परिवहन उपकरण भी शामिल हैं।
जहां तक संयुक्त राज्य अमरीका का सवाल है, वह अपने परमाणु उद्योग के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, अपने ईवी उद्योग के लिए पैलेडियम, साथ ही उर्वरक और रसायनों का आयात करना जारी रखे हुए है।
भारत ने इसलिए शुरू किया रूस के साथ आयात
भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को संयुक्त राज्य अमरीका और यूरोपीय संघ (ईयू) की आलोचना के बीच रूस से भारत के तेल आयात जारी रखने का पुरजोर बचाव किया।
मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूस से तेल आयात करने के कारण भारत अमरीका और यूरोपीय संघ के निशाने पर है। वास्तव में, भारत ने रूस से आयात करना इसलिए शुरू किया क्योंकि संघर्ष शुरू होने के बाद पारंपरिक आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी।
उस समय संयुक्त राज्य अमरीका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता को मजबूत करने के लिए भारत द्वारा इस तरह के आयात को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया था।
विदेश मंत्रालय मुताबिक भारत का आयात राष्ट्रीय आवश्यकता से प्रेरित है और इसका उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पूर्वानुमानित और किफायती ऊर्जा मूल्य सुनिश्चित करना है।
नुक्सान क्या
अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता हो जोकि वर्तमान में सस्ता मिल रहा है तो भारत को खाड़ी देशों से तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे भारत के लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। भारत की ऊर्जा नीति नए संकट में तो घिरेगी ही भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बहुत बड़ा असर पड़ेगा। आम जनता महंगाई की चक्की में पिस जाएगी।