लैंड पूलिंग योजना: किसानों की सहमति के बिना एक इंच भी जमीन जबरदस्ती नहीं ली जाएगी- हरपाल चीमा


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चंडीगढ़ः पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग योजना को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता और राज्य सरकार में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह योजना पूरी तरह किसान हितैषी और आपसी सहमति पर आधारित है। किसी भी किसान से एक इंच भी जमीन जबरदस्ती नहीं ली जाएगी। जमीन देना और न देना दोनों पूरी तरह किसानों की मर्जी पर आधारित है।

हरपाल चीमा ने इसको लेकर कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल को घेरा और कहा कि पिछली सरकारों के दौरान करीब डेढ़ दशक में पंजाब में हजारों अवैध कॉलोनियां काटी गईं, जहां सड़क बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थी। वहीं लाखों लोगों को रजिस्ट्री को लेकर परेशानी हुई। सैकड़ों लोगों के लाखों रुपए बिल्डरों के चक्कर में फंस गए, जिसके कारण उनके घर तबाह हो गए।

चीमा ने कहा कि आम लोगों को हुई परेशानियों को देखते हुए आप सरकार ने खुद लैंड पूलिंग पॉलिसी के माध्यम से जमीन एक्वायर करने का फैसला किया। इससे किसानों और आम लोगों दोनों को फायदा होगा। किसानों को प्रति एकड़ 1000 गज आवासीय जमीन और 200 गज व्यवसायिक प्लॉट मिलेगा, जिसकी कीमत अगले कुछ वर्षों में वर्तमान कीमत से करीब चार गुना होगी।

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अकाली-भाजपा और कांग्रेस पर साधा निशाना
चीमा ने कहा कि पिछले 10 सालों में अकाली-भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से मिलीभगत कर भू-माफियाओं ने पंजाब के विभिन्न शहरों में करीब 30 हजार एकड़ जमीन पर अवैध कॉलोनियां बनाई और अरबों रुपए के घपले घोटाले किए। उसका सीधा लाभ भू-माफिया, बिल्डरों और पिछली सरकारों के मंत्री विधायकों को हुआ, जबकि आमलोगों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ा। इन सबके लिए अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की सरकार जिम्मेदार है।

वहीं आम लोगों के लिए इस योजना के तहत बेहतर और आधुनिक सुविधाओं के साथ आवास उपलब्ध हो सकेगा क्योंकि वहां सड़क सीवरेज बिजली पानी और सार्वजनिक पार्क का निर्माण सरकार करेगी एवं आवासीय कानून का भी पूरी तरह पालन होगा जिससे लोगों को भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी उत्पन्न नहीं होगी।

किसानों को क्या होगा लाभ
चीमा ने कहा कि इस योजना से किसानों को एक और बड़ा फायदा यह होगा कि सरकार जमीन एक्वायर करेगी तो उन्हें आर्थिक लाभ के साथ सामाजिक सुरक्षा भी मिलेगी।
योजना के अंतर्गत आने वाले सभी किसानों को कम से कम 3 साल या जमीन विकसित होने तक हर साल 50 हजार प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी, ताकि निर्माण के दौरान उन्हें कोई आर्थिक परेशानी न हो। जबकि पिछली सरकारों के दौरान बिल्डर या भू-माफिया किसानों से औने-पौने दामों पर जबरदस्ती जमीन ले लेते थे और उन्हें बाद में किसी भी तरह की कोई आर्थिक सहायता नहीं करते थे। ऐसे हजारों मामले सामने आए हैं।

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