
चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आप सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अनुसूचित जाति उप-योजना (एससी सब-प्लान) के अंतर्गत कोई भी ठोस, दृश्य अथवा परिणाम-आधारित कार्य नहीं किया। दलित-हितैषी होने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद सरकार के पास आज तक कोई भी ऐसी आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है जो यह सिद्ध कर सके कि एससी सब-प्लान के तहत खर्च की गई राशि से दलित बस्तियों की स्थिति में कोई वास्तविक सुधार हुआ है।
पंजाब देश का वह राज्य है जहां अनुसूचित जाति (एससी) आबादी का अनुपात सबसे अधिक है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर एससी आबादी 16.6 प्रतिशत है, वहीं पंजाब में यह अनुपात 31.94 प्रतिशत है, जो लगभग 88.60 लाख लोगों के बराबर है। देश की कुल जनसंख्या में पंजाब की हिस्सेदारी मात्र 2.3 प्रतिशत है, लेकिन देश की कुल एससी आबादी में पंजाब का योगदान 4.3 प्रतिशत है। इतनी बड़ी जनसंख्या होने के बावजूद एससी सब-प्लान केवल बजट भाषणों और कागजी घोषणाओं तक ही सीमित रह गया है।
भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि पंजाब की 73.33 प्रतिशत एससी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। राज्य के 23 में से 14 जिलों में एससी आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है और 4,799 गांवों में यह अनुपात 40 प्रतिशत से ऊपर है। इससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि पंजाब में 57 ऐसे गांव हैं जहां 100 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति वर्ग की है, लेकिन इन क्षेत्रों के लिए एससी सब-प्लान के अंतर्गत कोई भी विशेष या लक्षित हस्तक्षेप नहीं किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में स्थिति अत्यंत गंभीर है। पंजाब में एससी साक्षरता दर 64.81 प्रतिशत है, जबकि राज्य की कुल साक्षरता दर 75.84 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 58.39 प्रतिशत है। उच्च शिक्षा में एससी विद्यार्थियों की भागीदारी और भी कम है, इसके बावजूद मान सरकार के पास न तो कोई ठोस छात्रवृत्ति नीति है और न ही कोई संरचित कौशल विकास ढांचा।
रोजगार के मोर्चे पर कैंथ ने कहा कि दलित समुदाय की स्थिति चिंताजनक है। केवल 35.88 प्रतिशत एससी आबादी ही श्रम बल का हिस्सा है और बड़ी संख्या अब भी कृषि मजदूरी या कम वेतन वाली असुरक्षित नौकरियों में फंसी हुई है। लगभग 59 प्रतिशत एससी परिवार जर्जर आवासीय स्थिति में रह रहे हैं, जो बुनियादी ढांचे की विफलता को दर्शाता है।
भाजपा नेता कैंथ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की कई जन-कल्याणकारी योजनाएं—प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना तथा विभिन्न पेंशन योजनाएँ—पंजाब में जानबूझकर ढंग से लागू नहीं की जा रही हैं, जिसके कारण गरीब और दलित परिवार आर्थिक अवसरों से वंचित रह रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एससी सब-प्लान कोई खैरात नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग का संवैधानिक अधिकार है। इस अधिकार की अनदेखी केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि खुला सामाजिक अन्याय है।
भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा ने मांग की कि मान सरकार तुरंत एससी सब-प्लान निधियों के उपयोग पर एक श्वेत पत्र जारी करे और एक पारदर्शी, जवाबदेह तथा परिणाम-केंद्रित प्रणाली लागू करे, ताकि दलित समुदाय का वास्तविक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।