गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार और संयुक्त राष्ट्र को प्रस्तुत करेगी व्यापक नीति दस्तावेज़ : कुलपति प्रो. करमजीत सिंह


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अमृतसर : पंजाब में गंभीर होते जा रहे जल संकट से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने घोषणा की है कि वह इस मुद्दे पर एक व्यापक नीति दस्तावेज़ तैयार करेग और उसे राज्य सरकार और संयुक्त राष्ट्र को प्रस्तुत करेगा।
यह जानकारी कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने विश्वविद्यालय में आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला में दी। यह कार्यशाला पंजाब के जल संकट पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति विश्लेषकों को एक मंच पर लाने के लिए आयोजित की गई थी।

प्रो. करमजीत सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी केवल अकादमिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहेग, बल्कि कार्यशाला के परिणामों को वैज्ञानिक आधार पर एक मजबूत नीतिगत ढाँचे में परिवर्तित करेग जिससे सरकारी स्तर पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज ही एक घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है जिसे राज्य सरकार और संयुक्त राष्ट्र को प्रस्तुत किया जाएगा। इसे जल संसाधन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भी भेजा जाएगा ताकि तत्काल और साक्ष्य-आधारित कार्रवाई की जा सके।

विशेषज्ञों में डॉ. तिलक राज शर्मा और डॉ. एस.एस. कुक्कल ने गिरते भूजल स्तर, बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और मौजूदा जल संरक्षण प्रणालियों की कमज़ोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बड़े पैमाने पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी बदतर हो जाएगी।

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तकनीकी सत्रों में कृषि में अनियंत्रित जल उपयोग, ट्यूबवेलों से अनियंत्रित जल निकासी, वर्षा जल संचयन के बुनियादी ढाँचे की कमी और औद्योगिक प्रभावों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक एक बहुआयामी रणनीति की सिफ़ारिश की, जिसमें वर्षा जल भंडारण प्रणालिया, चेकडैम का निर्माण, टिकाऊ कृषि पद्धतिया और व्यापक जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।

कार्यशाला के आयोजकों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि जीएनडीयू अपने शोध आकड़ों, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और क्षेत्रीय अध्ययनों को संकलित करके एक मज़बूत नीति दस्तावेज़ तैयार करेग जो पंजाब को जल संकट से उबारने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। पंजाब के जल संकट की पृष्ठभूमि में यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है, जहा भूजल की कमी की दर 156 प्रतिशत से अधिक है और अधिकांश ब्लॉकों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो कृषि को आर्थिक नुकसान और खतरे बढ़ेंगे।

कार्यशाला में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि विश्वविद्यालयों को नेतृत्व करना चाहिए और सरकारों को कार्यान्वयन करना चाहिए। यह दस्तावेज़ पंजाब के भविष्य का प्रतीक बनेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान की सरकार तुरंत कार्रवाई करेगी ताकि पंजाब की हरित क्रांति जल संकट में न बदल जाए।

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