सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 2 मार्च जालंधर, दर्शनों के लिए ऑनलाइन टोकन लेना होगा


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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 2 मार्च 2026, सोमवार को पुरातन जालंधर पहुंच रहे हैं। इस आयोजन में शहर भर की संस्थाएं, मंदिर कमेटियां भाग ले रही हैं। लोग पटेल चौक स्थित साईं दास स्कूल ग्राउंड में सुबह 8 से रात 8 बजे तक लोग ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकेंगे।
सुबह 8 से 10 और शाम को 6 से 8 बजे तक रुद्र पूजा होगी। प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि शहर वासी 11 करोड़ बार ओउ्म नमः शिवाय लिखकर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को समर्पित करेंगे। इसके लिए संस्था ने लोगों को कापियां बांटी थीं। दर्शन करने के लिए ऑनलाइन टोकन मिलेगा। व्हाट्सएप पर दिए गए समय पर दर्शन कर सकेंगे।
इसका कोई शुल्क नहीं है। इसके लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करनी होगी। https://gurupreetfoundation.com

लिंक पर क्लिक के बाद दर्शन पर्ची की आप्शन आएगी, जिस पर क्लिक करने के बाद आपको नाम, ईमेल एड्रेस, फोन नंबर और कितने लोग दर्शन करना चाहते हैं ये भर के रजिस्टर करना होगा। इसके बाद दर्शन पर्ची मिल जाएगी।

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बता दें कि श्री सोमनाथ भारत के बारह आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। यह भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बन्दरगाह में स्थित में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है।
प्राचीन भारतीय परंपराओं के अनुसार, सोमनाथ का संबंध चंद्र (चंद्रमा देवता) को उनके ससुर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्त कराने से है। चंद्रमा का विवाह दक्ष की सत्ताईस पुत्रियों से हुआ था। हालांकि, उन्होंने रोहिणी को अधिक महत्व दिया और अन्य रानियों की उपेक्षा की। व्यथित दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया और चंद्रमा ने प्रकाश(तेज) की शक्ति खो दी। प्रजापिता ब्रह्मा के मार्गदर्शन में, चंद्रमा प्रभास तीर्थ पहुंचे और भगवान शिव की पूजा की। चंद्रमा की महान तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और अंधकार के श्राप से मुक्त किया। पौराणिक परंपराओं के अनुसार, चंद्रमा ने एक स्वर्ण मंदिर का निर्माण कराया था, जिसके बाद रावण ने एक रजत मंदिर का निर्माण कराया, और माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने चंदन की लकड़ी से सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था।

 

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