
चंडीगढ़/सोमनाथ कैंथ
आम आदमी पार्टी (आप) के संगठन द्वारा जमीनी स्तर पर बाढ़ पीड़ितों की आवाज़ बनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वह ऐतिहासिक फैसला लिया है जो पिछली सरकारें कभी सोच भी नहीं सकीं। ‘आप’ के प्रदेश महासचिव दीपक बाली ने मुख्यमंत्री द्वारा घोषित बड़े राहत पैकेज को “दिल को शांति और संवेदना देने वाला” कदम बताते हुए कहा कि जब पार्टी का संगठन लोगों के दुख-दर्द को सरकार तक पहुँचाता है तो भगवंत मान जैसे जन-हितैषी नेता किसानों और पीड़ितों के हक़ में चट्टान की तरह खड़े हो जाते हैं।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश महासचिव दीपक बाली ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा घोषित राहत पैकेज ने साबित कर दिया है कि आप सरकार सही मायनों में लोगों की अपनी सरकार है। उन्होंने कहा कि ‘आप’ का संगठन पिछले कई दिनों से लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहा है और एक-एक पीड़ित और किसान से संपर्क करके उनकी मुश्किलों को समझ और दूर कर रहा है। पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने भी लगातार दौरे करके लोगों के दर्द को महसूस किया। इसी फीडबैक को जब संगठन ने सरकार तक पहुँचाया तो मुख्यमंत्री ने तुरंत लोगों की आवाज़ सुनी और उनके हक़ में फैसले लिए।
दीपक बाली ने मुख्यमंत्री के “जिसका खेत, उसकी रेत” के नारे की सराहना करते हुए कहा कि बाढ़ के कारण खेतों में जमा हुई रेत और मिट्टी को किसानों को खुद बेचने और इस्तेमाल करने की इजाज़त देना एक बेमिसाल कदम है। यह वह इजाज़त है जो पिछली किसी भी सरकार ने देने की हिम्मत नहीं की। इससे किसान अपनी ज़मीन को फिर से खेती योग्य बना सकेंगे।
इसके अलावा, दीपक बाली ने बताया कि फसल तबाह होने पर 20,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा देना एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि भारत के कई राज्यों में बाढ़ आती है, पर इतनी बड़ी मुआवज़ा राशि की घोषणा करके मुख्यमंत्री मान ने पंजाब को देश का पहला राज्य बना दिया है। उन्होंने आगे बताया कि बाढ़ में जान गँवाने वालों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये और घरों के नुकसान का सर्वेक्षण करवा कर मुआवज़ा देने का फैसला सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
बाली ने कहा कि यह सब इसीलिए संभव हो सका क्योंकि पटवारी से लेकर मुख्य सचिव तक, सभी मंत्री और चेयरमैन लगातार जमीनी स्तर पर लोगों के बीच थे। दीपक बाली ने पार्टी के एक कार्यकर्ता के तौर पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मान के इस जन-हितैषी फैसले ने पीड़ितों के लिए इस दुख की घड़ी में सहारे का काम किया है। पूरा संगठन, किसान और हर पीड़ित उनका धन्यवाद करता है क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे को पूरी शिद्दत और गहराई से समझ कर हल किया है।