पंजाब विधानसभा की घटना से अनुसूचित जाति समुदाय भावनात्मक रूप से आहत : एडवोकेट सत पॉल विरदी


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जालंधर/सोमनाथ कैंथ
पिछले कुछ दिनों से 15 जुलाई 2025 को विधानसभा में घटी घटना को लेकर वीडियो वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में इस्तेमाल की गई शब्दावली को लेकर अनुसूचित जाति भाईचारा आहत हुआ है। इस संबंध में बहुजन संदेश के साथ बातचीत करते हुए सीनियर एडवोकेट सत पॉल विरदी ने कहा है कि 15 जुलाई 2025 को पंजाब विधानसभा के अंतिम दिन जो घटना घटी, उसने राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस घटना से विशेष रूप से अनुसूचित जाति समुदाय में दुःख और निराशा फैल गई है, जो पंजाब की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है।

विधानसभा के रिकार्ड और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस विधायक बावा अवतार हैनरी (जूनियर) और आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा (विधायक, पायल) के बीच नशा मुक्त गांवों पर चर्चा के दौरान झगड़ा हो गया। जब विधायक गियासपुरा ने पूछा, “जब सरकार ने गांवों को नशामुक्त घोषित कर दिया है तो नशा कौन बेच रहा है-कांग्रेसी?” तो इस पर, बावा हैनरी ने अनुचित और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया, जिस पर हंगामा शुरू गया।

यह खेदजनक है कि अनुसूचित जाति के एक निर्वाचित प्रतिनिधि के विरुद्ध इस भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंची, बल्कि समुदाय की भावनाएं भी आहत हुईं। विधायक ग्यासपुरा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “अगर ये शब्द किसी ऊंची जाति के विधायक के खिलाफ इस्तेमाल किए गए होते तो तुरंत कार्रवाई की जाती।”

उपसभापति एस. जयकृष्णन रूडी और विधानसभा अध्यक्ष एस. कुलतार सिंह संधवान ने मामले में हस्तक्षेप किया और आश्वासन दिया कि संबंधित विधायक के खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी वीडियो रिकॉर्ड की जांच की मांग की और अपनी पार्टी की ओर से खेद व्यक्त किया।

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हम इस मामले को राजनीतिक द्वेष या पक्षपात के बजाय आपसी सम्मान, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी के नजरिए से देखना चाहते हैं।

इस संदर्भ में, हम बावा अवतार हेनरी (जूनियर) को विनम्रतापूर्वक याद दिलाना चाहते हैं कि वह एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हैं जहां 60 प्रतिशत से अधिक आबादी अनुसूचित जातियों की है। यह समुदाय लगातार बढ़ रहा है क्योंकि वह और उनके पिता अवतार हैनरी (सीनियर) को अपना विश्वास और वोट देते रहे हैं, जो कई बार विधायक और मंत्री रहे हैं।

हम डेरा सचखंड बल्लां में हैनरी से कई बार मिले हैं, जहां उन्होंने सद्भावना और सौम्यता की भावना व्यक्त की। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के चुनाव वाले दिन भी हैनरी का पूरा सहयोग रहा। ये सभी बातें उनके पारिवारिक शिष्टाचार और सार्वजनिक भाषण देने की विरासत को दर्शाती हैं।

इसलिए हम आशा करते हैं कि वे भविष्य में एक जिम्मेदार और समझदार रवैया अपनाएंगे, और समुदाय की भावना का सम्मान करने के लिए सार्वजनिक रूप से खेद या माफी व्यक्त करेंगे।
यह टकराव का समय नहीं है, बल्कि सलाह, समर्पण और आम सहमति का समय है। आइए हम सब मिलकर यह संदेश दें – “सम्मान की राजनीति करें, मानवता का अपमान नहीं।”

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