जिस लैंज़ बुलडॉग HL-12 ट्रेक्टर को लोग कबाड़ समझते थे, वह बना केलिफोर्निया के म्युजियम की शान, 1.25 करोड़ में बिका


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चंडीगढ़: भले ही भगत सिंह चौक के पास एक पुरानी टूटी-फूटी बिल्डिंग में पड़े 105 साल पुराने ट्रेक्टर लैंज़ बुलडॉग HL-12 को लोग कबाड़ समझते हों लेकिन जब यह ट्रेक्टर पंजाब खासकर जालंधर में आया होगा तो यह जालंधर की शान बना होगा लेकिन आज फिर यही ट्रेक्टर केलिफोर्निया के एक म्युजियम की शान बनने जा रहा है। एक खास बात इस ट्रेक्टर का जालंधर में होना पंजाबी किसानों के रुतबे को भी उजागर करता है।
जी हां, कोई जमाना था जब किसान खेती बैल, भैंसो की मदद से किया करते थे लेकिन तब खेती सीमित होती थी और बाजारीकरण नहीं था, मगर समय के साथ बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए ज्यादा अनाज की जरूरत ने खेती-बाड़ी में मशीनरी के आविष्कार की जरूरत पैदा की। तब जर्मनी के कंपनी Heinrich Lanz & Co. OHG के German engineer Fritz Huber ने खेती के लिए एक मशीनरी का आविष्कार किया जिसे नाम दिया गया लैंज़ बुलडॉग HL-12। यह ट्रेक्टर 1921 में बना और 1927 में खेती के काम में प्रयुक्त होने लगा।
अब जालंधर के भगत सिंह चौक के पास पुरानी बिल्डिंग में पड़े 1921 के लैंज़ बुलडॉग HL-12 ट्रैक्टर, जालंधर में 1.25 करोड़ रुपये कीमत लगी है। हालांकि इस विंटेज मशीन की मुंबई की एक कंपनी ने कीमत करीब 2 लाख रुपए आंकी थी लेकिन अमरीका में रहने वाले पुनीत वडेरा ने बताया कि जहाँ कई पड़ोसी इस सौ साल पुरानी गाड़ी को सिर्फ़ कबाड़ समझते थे, वहीं यह विंटेज मशीनरी की दुनिया में एक अनमोल चीज़ बनी हुई है।

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