
चंडीगढ़: पंजाब में कांग्रेस हाईकमान द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले किए गए बदलाव को लेकर पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर उपजने लगे हैं। पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा अमरिंदर राजा वड़िंग को फिर से प्रधान बनाने पर खफा है। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने अभी तक हाईकमान से पद मिलने के बाद धन्यवाद तक नहीं कहा।
यहां तक कि सोशल मीडिया पोस्ट तक नहीं डाली। चन्नी ने तो घर में समर्थकों की कल 11 बजे मीटिंग बुला ली है। कांग्रेस हाईकमान ने चन्नी को इलेक्शन कैंपेन कमेटी (चुनाव प्रचार समिति) का चेयरपर्सन और सुखजिंदर रंधावा को टिकट वितरण वाली कोर कमेटी का चेयरमैन नियुक्त कर खुश करने की कोशिश की है।
कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक पार्टी के करीब 10-15 बड़े नेता नई टीम बनने के बाद से नाराज हैं। वह ठीक उसी तरह वड़िंग के खिलाफ कैंपेन चला सकते हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक चरणजीत चन्नी खुद प्रधान पद चाहते थे। इसको लेकर रजामंदी भी हो चुकी थी लेकिन आखिरी वक्त में कांग्रेस ने जट्ट सिखों की नाराजगी के डर से राजा वड़िंग को ही प्रधान बने रहने दिया। 2022 में चरणजीत चन्नी की अगुआई में लड़कर कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी। चन्नी खुद मुख्यमंत्री रहते 2 सीटों से चुनाव हार गए थे।
वहीं रंधावा इस वजह से नाराज बताए जा रहे हैं कि अगर जट्ट सिख ही प्रधान रखना था तो उन्हें क्यों नहीं बनाया गया। वह भी तब, जबकि वड़िंग की अगुआई में कांग्रेस पहले तरनतारन उपचुनाव बुरी तरह हारी। फिर लोकल बॉडी चुनाव में वड़िंग अपने ही गृहक्षेत्र गिद्दड़बाहा में पार्टी को नहीं जिता सके। इससे पहले 2021 में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के बाद हाईकमान की मंजूरी मिलने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।”
चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी ने उन्हें किनारे किए जाने को लेकर सोशल मीडिया (X) पर लिखा- काश मेरे पास व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षा (हीनभावना) का भी कोई प्रतिरोधक (एंटीडोट/विषनाशक) होता। हालांकि पिछले 45 वर्षों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने भी अपने युवा जीवन को दशकों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा में समर्पित किया है। आखिर में तिवारी ने फेमस अंग्रेजी सॉन्ग की पंक्ति लिखी, ‘Que sera, sera, Whatever will be, will be…’, जिसका हिंदी अर्थ ‘जो होगा, सो होगा’ या ‘जो होना है, वह होकर रहेगा’