
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
कबीलों से लेकर छोटे-छोटे राज्यों के सत्ता सिंहासन के लिए शुरू हुई लड़ाइयां समय के साथ-साथ बड़ी जंगों का रूप धारण करती गईं।
पत्थर की कुदालों, लाठियों, भालों और तलवारों से शुरू हुई लड़ाइयां समय के साथ बदलती गई। समय-समय पर युद्धकलाएं नया रूप लेकर सामने आईं। तीर-कमान, तलवारों की लड़ाई तोपों के साथ लड़ी जाने लगी। तोपों के साथ लड़ी जाने वाली लड़ाई टैंकों, हवाई जहाजों रॉकेटों और मिसाइलों से लड़ी जाने लगीं।
हाल ही में भारत-पाकिस्तान जंग तथा रूस और युक्रेन युद्ध में जंग मिसाइलों और ड्रोनों के साथ लड़नी शुरू हो गई। कभी समय था राजा अपने दुश्मन की टोह लेने के लिए अपने जासूस भेजते थे जोकि भले ही आज राजा-महाराजा नहीं हैं दुश्मन की टोह लेने के लिए जासूस तैनात रहते हैं।
तकनीक से साथ विकसित होते नए युग में जासूसी का काम कीड़ों-मकोड़ों से लिया जाने लगा है। जी हां, कुछ समय पहले तो जासूसी के लिए मक्खियों जैसे दिखने वाले फ्लाई काइट्स की बातें सामने आई थीं तो अब जासूसी के लिए कॉकरोच सेना भी तैयार की जाने लगी है। जी हां, इन दिनों जर्मनी ने स्टार्टअप को आईटी बेस्ड कॉकरेच सेना तैयार करने का काम सौंपा हुआ है।
एक जर्मन कंपनी जीवित तिलचट्टों(कॉकरोच) से छोटे बैकपैक्स से लैस झुंड रोबोट विकसित कर रही है, ताकि खुफिया, निगरानी और टोही अभियानों को अंजाम दिया जा सके।
SWARM बायोटैक्टिक्स द्वारा डिज़ाइन किए गए, ये साइबॉर्ग कीड़े अव्यवस्थित, GPS-रहित या उच्च-जोखिम वाले वातावरण में काम कर सकते हैं जहां पारंपरिक ड्रोन और रोबोट अक्सर संघर्ष करते हैं। असली सफलता उनकी पीठ पर लगा कॉम्पैक्ट पेलोड है, जो निर्देशित गति, वास्तविक समय डेटा संग्रह और एन्क्रिप्टेड कम दूरी के संचार को सक्षम बनाता है, जिससे प्रत्येक कीट एक बायो-रोबोटिक स्काउट में बदल जाता है।
जर्मनी का स्टार्टअप हैल्सिंग ऐसे रोबोट कॉकरोच बना रहा है जोमाइक्रोफोन और सेंसर से लैस हैं और दुश्मन की सीमाओं चुपचाप घुसपैठ कर सकते हैं।
जर्मनी की एआरएक्स रोबोटिक्स, हैल्सिंग जैसी कंपनियां इस काम में उतरी हैं। ये कंपनिया स्पाई कॉकरोच के अलावा एआई बेस्ड रोबोट टैंक और मिनी पनडुब्बियां विकसित कर रही हैं।
जर्मनी ने बढ़ाया अपने रक्षा बजट
दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमरीका ने जर्मनी को सुरक्षा की गारंटी दे थी तथा जर्मनी को सीमित सैन्य संसाधन जुटाने की अनुमति दि गई थी। लेकिन रूस-युक्रेन युद्ध के चलते जर्मनी को समझ आ गया है कि अपनी सुरक्षा को अमरीका और नाटो के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए जर्मनी ने अपना रक्षा बजट तीन गुणा तक बढ़ा दिया है।
जर्मनी का डिफेंस पर साल 2029 तक 162 बिलियन यूरो खर्च करने प्लान है। युद्ध के लिए एआई बेस्ड उपकरण बनाने के लिए जर्मनी ने स्टार्टअप को फंडिंग शुरू कर दी है।