मुफ्त सुविधाओं पर SC का कड़ा रूख-कहा अगर सब कुछ मुफ्त दिया जाएगा तो काम कौन करेगा

नई दिल्ली: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आम जनता को दी जानी वाली मुफ्त सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है।पीठ ने  कहा कि अब समय आ गया है कि ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए, जो देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती हैं।

सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु पावर डिस्ट्रिब्यूशन कार्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें सभी उपभोक्ताओं को उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिनाद्वारा मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया है। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते कहा कि अगर सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली दी जाएगी, तो कौन काम करेगा?

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जस्टिस जयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति जस्टिस विपल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह समझ में आता है कि जो लोग बिजली बिल देने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए कल्याणकारी उपाय किए जाएं, लेकिन बिना सक्षम और असमर्थ के बीच अंतर किए सबको मुफ्त सुविधा देना क्या सही है।

बता दें, पंजाब में पहले से ही किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी सरकार आने के बाद से आम जनता को भी प्रतिमाह 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है। इससे पहले आम आदमी पार्टी दिल्ली में भी मुफ्त बिजली योजना का लाभ जनता को दे चुकी है।

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