
जालंधरः जालंधर के मेयर वनीत धीर और कमिश्नर संदीप ऋषि के प्रयासों से ठोस कचरा प्रबंधन को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में जालंधर नगर निगम द्वारा शुरू किए गए पिट्स प्रोसेसिंग प्लांट को एनजीटी ने मंजूरी दे दी है। अब अलग-अलग वार्डों में पिट्स प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होने से कचरे की समस्या से लोगों को निदान मिल सकेगा।
पिछले सात साल से जो पिट्स प्रोसेसिंग प्लांट हाईकोर्ट और एनजीटी के कारण शुरू नहीं हो पा रहा था, आखिरकार एनजीटी ने इसे शुरू करने के लिए अनुमति दे दी है। इससे शहर में पिट्स प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया तेज होगी। इस परियोजना का उद्देश्य पुराने डंप साइट पर जमा कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करना और शहर को स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त बनाना है।
जालंधर नगर निगम के हेल्थ अफसर डा. श्री कृष्ण शर्मा ने बताया कि एनजीटी की मंजूरी के बाद अब नगर निगम नांगलशामां में कचरे की प्रोसेसिंग शुरू कर सकता है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 5 टन से अधिक नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए शेड के साथ 32 पिट्स उपलब्ध हैं।नगर निगम के हेल्थ अफसर ने बताया कि किंग्स गार्डन हाउसिंग फ्लैट्स के जवाब में माननीय पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 साल पहले स्टे दिया था और 2 साल पहले स्टे हटा दिया गया था। इस निर्देश के साथ कि इस मामले को माननीय एनजीटी द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा।
पिट्स प्रोसेसिंग प्लांट एक ऐसी तकनीक है जिसके तहत कचरे को वैज्ञानिक तरीके से छांटकर उसका पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) और सुरक्षित निस्तारण किया जाता है। इस प्रक्रिया में कचरे को अलग-अलग श्रेणियों-जैसे प्लास्टिक, धातु, जैविक कचरा और अवशिष्ट सामग्री-में विभाजित किया जाता है। उपयोगी सामग्री को रीसायकल के लिए भेजा जाता है, जबकि शेष कचरे का सुरक्षित उपचार किया जाता है। जालंधर नगर निगम के हेल्थ अफसर डा. श्री कृष्ण शर्मा ने बताया कि एनजीटी (NGT) की मंजूरी के बाद अब नगर निगम नांगलशामां में कचरे की प्रोसेसिंग शुरू कर सकता है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 5 टन से अधिक नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए शेड के साथ 32 पिट्स पलब्ध हैं।
नगर निगम के हेल्थ अफसर ने बताया कि किंग्स गार्डन हाउसिंग फ्लैट्स के जवाब में माननीय पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 साल पहले स्टे दिया था और 2 साल पहले स्टे हटा दिया गया था। इस निर्देश के साथ कि इस मामले को माननीय एनजीटी द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा। अब इस मामले पर एनजीटी द्वारा एमएसडबल्यू नियम 2016 के अनुसार गीले कचरे की प्रोसेसिंग के निर्देश के साथ निर्णय लिया गया है।
पिट्स प्रोसेसिंग प्लांट एक ऐसी तकनीक है जिसके तहत कचरे को वैज्ञानिक तरीके से छांटकर उसका पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) और सुरक्षित निस्तारण किया जाता है। इस प्रक्रिया में कचरे को अलग-अलग श्रेणियों- जैसे प्लास्टिक, धातु, जैविक कचरा और अवशिष्ट सामग्री-में विभाजित किया जाता है। उपयोगी सामग्री को रीसायकल के लिए भेजा जाता है, जबकि शेष कचरे का सुरक्षित उपचार किया जाता है।