
नई दिल्लीः आपरेशन सिंदूर _भारत-पाकिस्तान के बीच सीज फायर के बाद भारत के आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख का संदेश लेकर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेश जा रहे हैं। भारत द्वारा फैसला किया गया है कि इन प्रतिनिधिमंडलों में कुछ का नेतृत्व सत्तारूढ़ पार्टियों के नेता तो कुछ प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व संसद में विरोधी दलों के नेता करेंगे। विरोधी दलों में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर करेंगे, जिस पर बवाल मच गया है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में आरोप लगने शुरू हो गए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि पार्टी द्वारा मंत्रालय को सांसद शशि थरूर का नाम नहीं दिया गया है। दरअसल कांग्रेस द्वारा जिन चार सांसदों के नाम दिए गए थे उनमें सांसद शशि थरूर का नाम नहीं था। संसद में राज्यसभा सदस्य कांग्रेसी नेता जयराम रमेश का कहना है कि सरकार पार्टी से बिना विचार-विमर्श के किसी सांसद को शामिल नहीं कर सकती। उन्होंने इसे एक शरारत करार दिया है।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा के स्पोक्समैन प्रदीप भंडारी ने कहा है कि जयराम रमेश अपने की सांसद शशि थरूर द्वारा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किे जाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी हर बोलने वाले नेता का विरोध करते हैं। वहीं भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने शशि थरूर का विरोध किए जाने पर कहा है कि यह कांग्रेस शासित के लिए भी अच्छा नहीं होगा।
सांसद शशि थरूर के अलावा इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के सांसद रविशंकर प्रसाद, जद(यूनाइटेड) के संजय कुमार झा, एनसीपी(शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, भाजपा सांसद बैजयंत पांडा, शिवसेना(शिंदे गुट) के श्री कांत शिंद और डीएमके पार्टी से कनिमोझी करुणानिधि आदि का नाम शामिल है।