
महिमा सिंह वाला (लुधियाना): पंजाब में कानूनी बंधनों के कारण लुप्त हो रही विरासती ग्रामीण खेलों को पुनः शुरू करने का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि राज्य सरकार विरासती खेलों को प्रफुल्लित करने के लिए सभी कानूनी बाधाएं हटाएगी, ताकि हमारे महान खेल विरासत की प्राचीन शान बहाल की जा सके।
राज्य में बैल दौड़ को फिर से शुरू करने के लिए पंजाब विधानसभा में कानून पास करने के लिए आज यहां बड़ी संख्या में विरासती खेल प्रेमियों द्वारा मुख्यमंत्री का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये दौड़ें हमारी ग्रामीण विरासत की व्याख्या करती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही पंजाब में बैलगाड़ी दौड़ आयोजित की जाती रही हैं और ये हमें हमारी संस्कृति और विरासत से जोड़े रखती हैं।
उन्होंने बताया कि 11 जुलाई, 2025 को ‘पंजाब विधानसभा में पशु क्रूरता निवारण (पंजाब संशोधन), 2025’ को सर्वसम्मति से पास किया गया। यह कानून जहां पंजाब की देसी पशु नस्लों को बचाने में मदद करेगा, वहीं बैलगाड़ी दौड़ फिर से शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
उन्होंने बताया कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा इस कानून को मंजूरी दी जानी है, जिसके बाद बैल दौड़ आयोजित की जा सकेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा कबूतर बाजी को फिर से शुरू करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
गांव किला रायपुर में होने वाले खेलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1933 में शुरू हुए इन खेलों को “मिनी ओलंपिक” या “ग्रामीण ओलंपिक” कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इन खेलों की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो चुकी है। इन खेलों को बीबीसी और डिस्कवरी जैसे बड़े चैनलों ने कवर किया है और यहां तक कि देश के राष्ट्रपति भी इन खेलों को देखने आते रहे हैं।