
नई दिल्लीः भारत और अमरीका के बीच ट्रेड डील में रुकावट आ गई है। दोनों पक्ष कृषि और डेयरी क्षेत्र में एक साझा आधार बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
“मांसाहारी दूध” को लेकर सांस्कृतिक चिंताओं के कारण, भारत ने अमरीकी डेयरी उत्पादों के आयात को अनुमति देने में मना कर दिया है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त को देशों के साथ डील करने की समय सीमा तय की है, अन्यथा अमरीका भारत पर मनमाना टैरिफ लगाएगा।
भारत क्यों मना कर रहा ?
देश की 38 प्रतिशत आबादी शाकाहारी है और दूध को 100 फीसदी शाकाहारी माना जाता है। वहीं देश में धार्मिक अनुष्ठानों में दूध और घी का उपयोग होता मगर अमरीका में गायों को ऐसा चारा खिलाने की अनुमति है, जिसमें सूअर, मुर्गी, मछली और कई जानवरों के अंग शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि सूअर और घोड़े का खून भी पिलाया जाता है। भारत अमरीका पर सख्त प्रमाणीकरण के लिए दबाव डाल रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयातित दूध उन अमरीकी गायों से आता है जिन्हें मांस या रक्त जैसे पशु आधारित उत्पाद नहीं खिलाए गए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने धार्मिक और सांस्कृतिक चिंताओं का हवाला देते हुए इसे “असंगत सीमा” माना है। भारत का पशुपालन एवं डेयरी विभाग खाद्य आयात के लिए पशु चिकित्सा प्रमाणन अनिवार्य करता है। इन प्रमाणपत्रों को जारी करने की एक शर्त यह है: “स्रोत पशुओं को कभी भी मांस या हड्डी के चूर्ण से बने आहार नहीं खिलाए गए हैं।