
जालंधर/सोमनाथ कैंथ
जालंधर के राम नगर और गांधी नगर निवासियों का रेलवे विभाग के खिलाफ आज गुस्सा फूट पड़ा और निवासी राम नगर फाटक पर ट्रैक पर बैठ गए। निवासियों का गुस्सा इस कारण था कि हर साल की तरह बाबा सोढल मेले के मौके पर राम नगर फाटक को बंद करना।
भारी बारिश के कारण गाजी गुल्ला रोड पर बारिश का पानी खड़ा होने के कारण लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। वैसे भी गाजी गुल्ला में बिना बारिश के भी सीवरेज का पानी भरा रहता है और ऊपर से सड़क की हालत ऐसी है कि न जाने कब कोई गिरकर चोटिल हो जाए।
लोगों के रेलवे ट्रैक पर धरना लगाए जाने की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी और पूर्व विधायक एवं सीपीएस के.डी. भंडारी मौके पर पहुंचे और लोगों की बातचीत सुनी। मौके पर ही उन्होंन लोगों की समस्या को देखते हुए फाटक को खुलवा दिया।
बता दें की हर साल सोढल के मेले पर रेलवे फाटक बंद कर दिया जाता है। लोगों को अगर शहर या इंडस्ट्रीय एरिया में जाना हो तो कई किलोमीटर सफर तय करना पड़ता है। हर साल लोगों की परेशानी को देखते हुए रॉयल क्लब की ओर से रेलवे अधिकारियों, जिला प्रशासन और मंत्रियों, विधायकों और सांसदों तक यह मामला उठाया जाता है लेकिन हर साल रेलवे की ओर से रॉयल क्लब द्वारा लोगों की उठाई जाती समस्या को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिस कारण आज राम नगर और गांधी नगर निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा।
नगर निगम हल्के से ले रहा लोगों की समस्या
गाजी गुल्ला में करीब डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से सीवरेज के पानी की समस्या है लेकिन नगर निगम इस समस्या को हलके से ले रहा है।
बता दें कि गाजी गुल्ला के पास सीवर लाइन में यह समस्या कुछ साल पहले सुपर सक्शन मशीन द्वारा सीवरेज लाइन की सफाई के बाद पैदा हुई है। इसके बाद भले ही पानी को बाईपास करने की कोशिश की गई लेकिन समस्या बढ़ती ही गई।
वहीं पूर्व पार्षद ज्ञान चंद के समय गाजी गुल्ला में पास 70 हजार से 80 हजार लीटर पानी की कपेसिटी का बनाया जाने वाला कुआं आज तक नगर निगम नहीं बनवा पाई है। यह कुआं इसलिए पास और टैंडर करवाया गया था कि जब बरसात हो तो बरसाती पानी इसमें स्टोर किया जा सके और जब बरसात खत्म हो तो स्टोर किया गया बरसात का पानी आगे पंप किया जा सके।
यह कुआं इसलिए भी जरूरी है कि गाजी गुल्ला के मुकाबले राम नगर गांधी नगर काफी नीचे हैं और पानी को पहले ही पंप करने के लिए गाजी गुल्ला के पास एक डिस्पोजल पंप लगाया गया। मगर इसके साथ अब नया कुआं बनाने की योजना थी जोकि इसका दूसरा उपाय है।