भारतीय वायु सेना की बढ़ी ताकत, HAL ने हल्के लड़ाकू विमान-तेजस और एचटीटी-40 हेलीकॉप्टर सौंपे

कर्नाटक के बेंगलुरु में आज शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू की मौजूदगी में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने भारतीय वायु सेना को दो लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) दो-सीटर ट्रेनर तथा तीन एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर हेलीकॉप्टर सौंपे। साथ ही, पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) को चार ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (एनजी) हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध कराए गए।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस हस्तांतरण को देश की स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता, तकनीकी आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य भारत को अपनी विमानन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम, आत्मनिर्भर एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता के मूल मंत्र के साथ कार्य शुरू किए जाने के बाद से देश में अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का स्वदेशी रूप से निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने रक्षा मंत्रालय द्वारा इस कार्य को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने न केवल रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) को रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने के लिए कदम उठाए हैं, बल्कि निजी उद्योग को भी प्रोत्साहित किया है, ताकि सभी को समान अवसर प्राप्त हो सकें।

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आत्मनिर्भरता को समय की मांग बताया
रक्षा मंत्री ने एयरोस्पेस क्षेत्र में व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस प्रणालियों के विकास में अचानक कोई ‘बड़ा बदलाव’ नहीं हो सकता है। यह एक व्यापक और क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के पुर्जे तथा घटक शामिल होते हैं। सिंह ने कहा कि इसमें शामिल सभी उत्पाद और पुर्जे एक लंबी सीढ़ी के छोटे-छोटे पायदानों की तरह हैं; हमें एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से चुनौतियां भी आएंगी, लेकिन हमें उन्हें एयरोस्पेस जैसे जटिल और महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रगति हासिल करने के व्यापक रोडमैप में मील के पत्थर के रूप में देखना चाहिए।

हस्तांतरण समारोह को नागरिक उड्डयन और रक्षा एयरोस्पेस क्षमताओं के बीच बढ़ते तालमेल का प्रतीक
राजनाथ सिंह ने इस हस्तांतरण समारोह को नागरिक उड्डयन और रक्षा एयरोस्पेस क्षमताओं के बीच बढ़ते तालमेल का प्रतीक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मजबूत विमान निर्माण उद्योग का विकास केवल रक्षा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। रक्षा मंत्री ने ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का आह्वान किया, जो नागरिक और सैन्य, दोनों तरह के विमानन क्षेत्रों की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि जब विमान डिजाइन, एवियोनिक्स, प्रणोदन, मिश्रित सामग्री, उड़ान नियंत्रण प्रणाली, विनिर्माण और प्रमाणन जैसी क्षमताएं देश के भीतर विकसित होती हैं, तो इससे पूरे एयरोस्पेस क्षेत्र को लाभ होता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हमें एक ऐसा एकीकृत एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा, जो हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। मुझे विश्वास है कि हम अपनी सामूहिक शक्ति से इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।

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