चंडीगढ़ : पंजाब विधानसभा में Congress MLAs को सदन के भीतर जाने से रोकने और विपक्ष की आवाज दबाने के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी सरकार को घेरते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस तरह संसद में विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के बाद महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही की गई, उसी तरह पंजाब विधानसभा में भी विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। Congress ने आरोप लगाया कि सुखपाल सिंह खैहरा को निलंबित करने और Congress MLAs, विशेषकर महिला विधायकों को सदन में प्रवेश से रोकने की घटनाएं सरकार की लोकतांत्रिक सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
परगट सिंह ने कहा कि विपक्ष विधानसभा में जनता के मुद्दे उठाने और सरकार से जवाब मांगने के लिए चुना जाता है लेकिन जब विपक्षी विधायकों को सदन के भीतर अपनी बात रखने से रोका जाए और बाहर आकर भी उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर देने के बजाय सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। जबकि पंजाब विधानसभा में विपक्ष पंजाब के पानी, डैम सेफ्टी एक्ट, बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र, बेअदबी के मामलों और लैंड पूलिंग नीति के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता था, इसलिए उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता 2027 में आप सरकार को सबक सिखाएगी।
पंजाब के पानी के मुद्दे पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरदार परगट सिंह ने कहा कि यमुना के पानी और पंजाब के जल अधिकारों को लेकर स्पष्ट कानूनी तथा संवैधानिक रुख अपनाने की आवश्यकता है। सरकार पांच प्रस्ताव लेकर आई है, लेकिन केवल प्रस्ताव पारित करने से पंजाब के हित सुरक्षित नहीं हो सकते। इसके लिए ठोस कानूनी कदम उठाने और अदालतों में पंजाब का पक्ष मजबूती से रखने की जरूरत है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव ला चुकी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कानून या ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
Congress ने कहा कि राजस्थान को पानी देने के मुद्दे पर भी पहले प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। ऐसे में सरकार को केवल राजनीतिक दिखावा करने के बजाय पंजाब के हितों की रक्षा के लिए अपनी नीति और कानूनी कार्रवाई स्पष्ट करनी चाहिए। पंजाब के पानी का मामला राज्य के भविष्य, किसानों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इस पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक नौटंकी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर केवल बयानबाजी करती है, जबकि कानूनी लड़ाई में प्रभावी पैरवी करने की जरूरत है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किलोमीटर तक बढ़ाने के फैसले को कांग्रेस ने चुनौती दी थी। लेकिन पंजाब के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की गई।
डैम सेफ्टी एक्ट के मुद्दे पर भी Congress ने सरकार से जवाब मांगा। परगट सिंह का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में पंजाब के अधिकारों और हितों की रक्षा करना चाहती है, तो उसे अदालतों में मजबूत कानूनी पक्ष रखना चाहिए और संबंधित मामलों में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। केवल विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
बेअदबी के मामलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने कहा कि इन मामलों में न्याय सुनिश्चित करना पंजाब की जनता की भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। सरकार को बताना चाहिए कि संबंधित कानूनी कार्यवाही में प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की गई और जिन मामलों में न्याय की उम्मीद लगाकर लोगों ने सरकार पर भरोसा किया था, उनमें अब तक ठोस परिणाम क्यों नहीं मिले। कांग्रेस ने कहा कि धार्मिक भावनाओं और न्याय जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ जनता और किसानों के विरोध के बावजूद सरकार दोबारा ऐसी नीति लागू करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस नीति का विरोध जारी रखेगी और पंजाब की जमीन को कॉरपोरेट हितों के हवाले नहीं होने देगी।