Guru Nanak Dev University में Commonwealth एशिया ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी वर्कशॉप का उद्घाटन

अमृतसर : Guru Nanak Dev University, अमृतसर द्वारा उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के नेतृत्व में Commonwealth ऑफ लर्निंग–Commonwealth एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (कोल-सेमका), नई दिल्ली के सहयोग से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉमनवेल्थ एशिया ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी वर्कशॉप का शुभारंभ किया गया।
श्री अमृतसर साहिब के 450वें स्थापना वर्ष को समर्पित इस वर्कशॉप का उद्घाटन नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (नैक) के निदेशक प्रो. (डॉ.) गणेशन कन्नाबिरन, कोल-सेमका के निदेशक प्रो. बी. शद्रच तथा विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने संयुक्त रूप से किया।
इस वर्कशॉप में श्रीलंका, मलेशिया और ब्रुनेई सहित विभिन्न कॉमनवेल्थ देशों के 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों तथा भारत के 50 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा को रोजगार की बदलती आवश्यकताओं से जोड़ना तथा विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत विश्वविद्यालय के ओपन डिस्टेंस लर्निंग एवं ऑनलाइन स्टडीज के निदेशक प्रो. सुभीत कुमार जैन के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया तथा अतिथियों का पुष्पों से स्वागत किया गया।
Guru Nanak Dev University के डीन अकादमिक मामले प्रो. हरविंदर सिंह सैनी ने अपने संबोधन में अल्पावधि के कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अकादमिक कार्यक्रमों में व्यावहारिक शिक्षा को उचित स्थान देने से विद्यार्थियों की पेशेवर क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है। ऐसे प्रयास ओपन एवं डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक हो सकते हैं।
उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने अपने उद्घाटन संबोधन में ज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने वाली संस्थाओं के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखते हुए उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं और रोजगार के अवसरों के अनुरूप अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, विद्यार्थियों को विषय संबंधी ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना भी शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, ताकि वे रोजगार प्राप्त करने और अपने पेशेवर जीवन में निरंतर प्रगति करने में सक्षम बन सकें।
कोल-सेमका के निदेशक डॉ. बी. शद्रच ने मुख्य संबोधन देते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों के समक्ष आने वाली उन चुनौतियों पर चर्चा की, जिनका संबंध शैक्षणिक कार्यक्रमों को श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने से है।
वर्कशॉप के दौरान पाठ्यक्रमों में लंबे समय से चली आ रही एकरूपता, विद्यार्थियों में संवाद एवं अन्य सॉफ्ट स्किल्स की कमी, अकादमिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच दूरी तथा डिग्री प्राप्त करने के बाद रोजगार हासिल करने में आने वाली कठिनाइयों जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही लचीले शिक्षा मार्गों, चरणबद्ध प्रमाण-पत्रों, डिजिटल शिक्षण संसाधनों और व्यापक स्तर पर संचालित ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
वर्कशॉप में इस बात पर बल दिया गया कि उच्च शिक्षा को रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए पाठ्यक्रमों में सुधार, अनुभव-आधारित शिक्षा तथा विद्यार्थियों की रोजगार योग्यता का परिणाम-आधारित मूल्यांकन समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. के. एस. चहल भी उपस्थित थे।
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