
नई दिल्ली:सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।
कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों के काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। जिन महिला अफसरों को गलत या मनमाने मूल्यांकन के कारण कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूरी पेंशन मिलेगी।
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि इन अधिकारियों की 20 साल की न्यूनतम सेवा पूरी मानी जाएगी। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो।
बता दें सुचेता ईडन सहित अन्य महिला अधिकारियों ने याचिका लगाई थीं, जिनमें 2019 की नीति और आर्मर्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के फैसलों को चुनौती दी थी