चंडीगढ़ : पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी(PPCC) के नवनियुक्त अध्यक्ष एवं विधायक परगट सिंह ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते(DA) के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का नोटिस जारी किए जाने पर आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों और आम लोगों से बड़े-बड़े वादे किए थे, आज उसी सरकार के कार्यकाल में कर्मचारियों और पेंशनरों को अपने जायज हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पंजाब के कर्मचारियों के DA के बकाये से संबंधित सुनवाई के दौरान पंजाब के इतिहास में पहली बार चीफ सेक्रेटरी को क्रिमिनल कंटेम्प्ट का नोटिस जारी होना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों में पंजाब ने ऐसी सरकार नहीं देखी, जहां विधायक रो-रोकर पंजाब का हाल बयां कर रहे हैं, अधिकारियों को जिल्लत का सामना करना पड़ रहा है, दिल्ली के धाड़वी पंजाब के खजाने पर ऐश कर रहे हैं और पंजाब का हर वर्ग सरकार से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि यह केवल डीए का मामला नहीं है, बल्कि पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं और सरकारी जवाबदेही पर खड़ा हुआ एक बड़ा सवाल है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनर पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। उन्होंने वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर पंजाब के विकास में योगदान दिया है और अपने वेतन तथा पेंशन से जुड़े कानूनी लाभ मांगना उनका अधिकार है, सरकार की कोई मेहरबानी नहीं। उन्होंने सवाल किया कि जब हाईकोर्ट ने डीए की लंबित किस्तें जारी करने के निर्देश दिए हैं, तो सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका हक देने की बजाय सुप्रीम कोर्ट में अपील और कानूनी पेचीदगियों के पीछे क्यों छिप रही है?
परगट सिंह ने कहा कि ‘आप’ सरकार के लिए अदालतों में जवाब देने से भी ज्यादा जरूरी पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों को जवाब देना है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि सरकार पूरे मामले की स्थिति सार्वजनिक करे, लंबित डीए का स्पष्ट रोडमैप बताए और कर्मचारियों-पेंशनरों के बकाया भुगतान के संबंध में समयबद्ध फैसला ले। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों और पेंशनरों के जायज हकों की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है और पंजाब सरकार की हर उस कार्रवाई का विरोध करेगी, जिससे उनके अधिकार प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘बदलाव’ और ‘ईमानदार शासन’ के दावे करने वाली सरकार के कार्यकाल में यदि हाईकोर्ट को सरकार के हलफनामे की सच्चाई पर सवाल उठाना पड़े, तो मुख्यमंत्री भगवंत मान इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। पंजाब की जनता और कर्मचारी वर्ग अब भाषण नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और अपने हक का भुगतान चाहते हैं।