
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन ने देश वासियों को दीवाली पर बड़ा तोहफा देने की घोषणा की है।
यह तोहफा दीवाली पर जीएसटी में होने जा रहे बड़े बदलाव को लेकर है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने जीएसटी की दो स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत किए जाने की बात कही है इस बदलाव से आम आदमी को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय की तरफ से जीएसटी काउंसिल को एक प्रस्ताव भेजा गया है जिसमें टैक्स रेट कम करने और जीएसटी को सरल बनाने का लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2017 में लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिससे देश को लाभ हुआ है। प्रधानमंत्री ने जीएसटी के तहत अगली पीढ़ी के सुधारों के महत्व पर जोर दिया, जिससे आम आदमी, किसानों, मध्यम वर्ग और एमएसएमई को राहत मिलेगी।
तीन स्तंभों पर केंद्रित होगा सुधार
जैसा कि वित्त मंत्रालय द्वार एक्स पर बताया गया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के लिए, केंद्र सरकार जीएसटी में महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव कर रही है। यह तीन स्तंभों पर केंद्रित होगा:
- संरचनात्मक सुधार
- दरों का युक्तिकरण, और
- जीवन की सुगमता।
केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों के युक्तिकरण और सुधारों पर अपना प्रस्ताव जीएसटी परिषद द्वारा गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) को इस मुद्दे की जांच के लिए भेज दिया है।
अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों में समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से आम आदमी, महिलाओं, छात्रों, मध्यम वर्ग और किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कर दरों का युक्तिकरण शामिल है।
सुधारों का उद्देश्य वर्गीकरण संबंधी विवादों को कम करना, विशिष्ट क्षेत्रों में उलटे शुल्क ढांचों को सुधारना, दरों में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करना और व्यापार सुगमता को और बढ़ाना है। ये उपाय प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को मज़बूत करेंगे, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे और क्षेत्रीय विस्तार को सक्षम करेंगे।
केंद्र के प्रस्तावित सुधारों के प्रमुख स्तंभ:
स्तंभ 1: संरचनात्मक सुधार:
उलटे शुल्क ढाँचे में सुधार: इनपुट और आउटपुट कर दरों को संरेखित करने के लिए उलटे शुल्क ढाँचों में सुधार ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट के संचय में कमी आए। इससे घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।
वर्गीकरण संबंधी मुद्दों का समाधान: दर ढाँचों को सुव्यवस्थित करने, विवादों को कम करने, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सभी क्षेत्रों में अधिक समानता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए वर्गीकरण संबंधी मुद्दों का समाधान।
स्थिरता और पूर्वानुमान: उद्योग का विश्वास बढ़ाने और बेहतर व्यावसायिक योजना बनाने में सहायता के लिए दरों और नीतिगत दिशा पर दीर्घकालिक स्पष्टता प्रदान करना।
स्तंभ 2: दरों का युक्तिकरण:
आम आदमी की वस्तुओं और महत्त्वाकांक्षी वस्तुओं पर करों में कमी: इससे सामर्थ्य बढ़ेगा, उपभोग को बढ़ावा मिलेगा और आवश्यक एवं महत्त्वाकांक्षी वस्तुएँ व्यापक जनसंख्या के लिए अधिक सुलभ होंगी।
स्लैब में कमी: मूलतः दो स्लैब – मानक और योग्यता – के साथ सरल कर की ओर बढ़ना। केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं के लिए विशेष दरें।
क्षतिपूर्ति उपकर: क्षतिपूर्ति उपकर की समाप्ति ने राजकोषीय गुंजाइश बनाई है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जीएसटी ढांचे के भीतर कर दरों को युक्तिसंगत और संरेखित करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान किया गया है।
स्तंभ 3: जीवन में आसानी:
रजिस्ट्रेशन: निर्बाध, प्रौद्योगिकी-चालित और समयबद्ध, विशेष रूप से छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए।
रिटर्न: पहले से भरे हुए रिटर्न लागू करें, जिससे मैन्युअल हस्तक्षेप कम होगा और विसंगतियाँ दूर होंगी।
रिफंड: निर्यातकों और उल्टे शुल्क ढांचे वाले लोगों के लिए रिफंड की तेज़ और स्वचालित प्रक्रिया।
उपरोक्त तीन आधारभूत स्तंभों पर आधारित केंद्र का प्रस्ताव, मंत्रिसमूह के साथ आगे के विचार-विमर्श के लिए साझा किया गया है। केंद्र ने सभी हितधारकों के बीच रचनात्मक, समावेशी और आम सहमति पर आधारित संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से यह पहल की है।
सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के अनुरूप, केंद्र राज्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। वह आने वाले हफ्तों में राज्यों के साथ व्यापक सहमति बनाएगा, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित अगली पीढ़ी के सुधारों को लागू किया जा सके।
जीएसटी परिषद, जब अपनी अगली बैठक करेगी, तो मंत्रिसमूह की सिफारिशों पर विचार-विमर्श करेगी और शीघ्र कार्यान्वयन के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा ताकि चालू वित्त वर्ष में अपेक्षित लाभ पर्याप्त रूप से प्राप्त हो सकें।