
नई दिल्लीः सिकल सेल बीमारी का पता लगाने के लिए भारत सरकार द्वारा अब तक लगभग 5.72 करोड़ लोगों की जांच करवाई जा चुकी है। यह जांच भारत सिकल सेल मुक्त भविष्य अभियान के तहत की जा रही है। इसकी जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य संत्रालय द्वारा दी गई है।
उल्लेखनीय है कि सिकल सेल बीमारी एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है, जो सीधे हमारे खून में रेड ब्लड कार्पल्स(आरबीसी) को प्रभावित करती हैं। इस बीमारी से खून में आरबीसी कम हो जाते हैं, जिस कारण शरीर के अंगों में सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे शरीर में थकान, दर्द और कमजोरी आ जाती है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं करवाया तो यह बीमारी खतरनाक हो सकती है।
यहां यह बताने योग्य है कि सिकल सेल बीमारी के मामले भारत में ज्यादा देखने को मिलते हैं विशेष जहां आदिवासी लोग रहते हैं। यही नहीं यह बीमारी गैर आदिवासी लोगों में भी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश की कुला आबादी का करीब 8.6 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 6.78 करोड़ लोग आदिवासी हैं। यह भी बता दें कि इस रोग का कोई स्थायी उपचार नहीं है। इसमें कुछ दर्द निवारक दवाएं ही दी जाती हैं।
