
जालंधरः सत्गुरु रविदास वेलफेयर सोसायटी(रजिस्टर्ड) की ओर से जालंधर के राम नगर में श्री गुरु रविदास महाराज के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में समारोह करवाय गया। इस दौरान गायक विजय हंस की ओर से श्री गुरु रविदास महाराज की महिमा में गाए गए हरेक गीत में राम नगर में बेगमपुरा शहर का नजारा नजर आया।
बहुत जनम बिछुरे थे माधउ, इहु जनमु तुम्हारे लेखे।।
कहि रविदास आस लगि जीवउ, चिर भइओ दरसनु देखे।।
कार्यक्रम की शुरुात गायक विजय हंस की ओर से बहुत जनम बिछुरे थे माधउ, इहु जनमु तुम्हारे लेखे।। से की गई। जैसे-जैसे समय बीतता गया श्री गुरु रविदास महाराज की शरण में बैठी संगत भक्ति सागर में डूबती जा रही थी। एक-एक शब्द गुरु की महिमा का बखान कर रहा था। समारोह को देखने के लिए राम नगर ही नहीं जालंधर के कोने-कोने से लोग राम नगर पहुंचे हुए थे।
गरीब निवाजु गुसाईआ मेरा माथै छत्रु धरै : गुलशन सोढी
श्री गुरु रविदास महाराज की महिमा का बखान करते हुए सोसायटी के चेयरमैन गुलशन सोढी ने कहा कि सबकुछ करने वाले श्री गुरु रविदास महाराज है। उनकी कृपा के बिना कुछ नहीं हो सकता है। गुरु रविदास महाराज जी के ही शब्द ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै । का सार ही यही है।
ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै ।
गरीब निवाजु गुसाईआ मेरा माथै छत्रु धरै ॥
जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै ।
नीचउ ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै ॥
नामदेव कबीरू तिलोचनु सधना सैनु तरै ।
कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सभै सरै ॥
हे प्रभु ! तुम्हारे बिना कौन ऐसा कृपालु है जो भक्त के लिए इतना बड़ा कार्य कर सकता है । तुम गरीब तथा दीन – दुखियों पर दया करने वाले हो। तुम ही ऐसा कृपालु स्वामी हो जो मुझ जैसे अछूत और नीच के माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया । तुम मुझे राजाओं जैसा सम्मान प्रदान कर दिया । मैं अभाग हूँ । मुझ पर तुम्हारी कृपा असीम है । तुम मुझ पर द्रवित हो गए । हे स्वामी तुमने मुझ जैसे नीच प्राणी को इतना उच्च सम्मान प्रदान किया । तुम्हारी दया से नामदेव , कबीर जैसे जुलाहे, त्रिलोचन जैसे सामान्य , सधना जैसे कसाई और सैन जैसे नाई संसार से तर गए । उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया । गुरु रविदास कह्ते हैं – हे संतों , सुनो ! हरि जी सब कुछ करने में समर्थ हैं । वह कुछ भी सकते हैं ।
