PMKVY के तहत प्रशिक्षित महिलाओं को नहीं मिल रहा उचित मूल्य और बाजार: कैंथ


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नाभा/चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी योजनाओं (पीएमकेवीवाई) के तहत प्रशिक्षित महिलाओं को बाज़ार और उनके उत्पादों का उचित मूल्य न मिलने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस स्थिति के लिए पंजाब सरकार की प्रशासनिक विफलता को जिम्मेदार ठहराया।

कैंथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस और परिणामोन्मुख प्रयास कर रही है। पीएमकेवीवाई के माध्यम से महिलाओं को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और आर्थिक सशक्तिकरण के रास्ते प्रदान किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी 2024–25 में 22.79% से बढ़कर 2025–26 में 25.80% हो गई है, जो योजना की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाता है। इस योजना के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, स्वास्थ्य सेवा, ब्यूटी एवं वेलनेस, हस्तशिल्प और परिधान जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, परिवहन, आवास और प्रशिक्षण के बाद रोजगार सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

कैंथ ने कहा कि केंद्र सरकार की सोच “महिला विकास” से आगे बढ़कर “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की ओर है, जिसमें महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं बल्कि देश के विकास की प्रमुख भागीदार हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि मातृत्व सहायता योजनाएं, स्वच्छता अभियान, वित्तीय समावेशन और बालिका शिक्षा से जुड़ी योजनाएं महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। भाजपा नेता कैंथ ने आरोप लगाया कि इन सभी प्रयासों के बावजूद पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की लापरवाही के कारण इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है।

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नाभा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्होंने पाया कि महिलाओं को प्रशिक्षण तो मिल रहा है, लेकिन उन्हें अपने उत्पादों के लिए न तो उचित बाजार मिल रहा है और न ही उचित मूल्य। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण बताया।

भाजपा नेता कैंथ ने कहा कि इस प्रकार की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से जोड़ा जाएगा, केंद्र की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कराया जाएगा और महिलाओं को सीधे बाजार एवं रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सहकारी बैंकों और संबंधित विभागों में हो रही देरी इस बात का संकेत है कि सरकार जनकल्याण के बजाय राजनीतिक प्राथमिकताओं को महत्व दे रही है।

कैंथ ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने जल्द ही अपना रवैया नहीं बदला, तो जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सम्मान सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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