IIT Mandi में शूद्रों को “उच्च वर्गों की सेवा” करनी चाहिए poster पर विवाद

आज़ादी के 79 साल बाद भी, भारत के दलित (अनुसूचित जाति) व्यवस्थित हिंसा, अपमान और बहिष्कार का सामना कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण IIT Mandi में जन्माष्टमी समारोह के दौरान जाति आधारित लगाया गया एक poster है, जिसकों लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में कहा गया है कि शूद्रों को “उच्च वर्गों की सेवा” करनी चाहिए।
संस्थान पर जन्म और मृत्यु के चक्र जैसे अवैज्ञानिक विचारों के अलावा सामाजिक असमानता को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्टर लगाए जाने पर आईआईटी संस्थान मंडी की काफी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिखा कि आईआईटी जैसे प्रीमियम संस्थानों को समानता, गरिमा और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाना चाहिए, न कि जातिगत ऊंच-नीच को। “भगवद गीता — द टाइमलेस विज़डम” नाम का यह पोस्टर इंस्टीट्यूट ऑडिटोरियम के बाहर लगाया गया है। यह समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बांटता है।
इसमें तस्वीरों के ज़रिए यह समझाया गया है कि ब्राह्मणों का कर्म “भगवान का संदेश फैलाना” है, जबकि क्षत्रियों का कर्तव्य “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” है और वैश्यों का “इकॉनमी को चलाना, दूसरों की मदद करना” है। शूद्रों को “ऊंचे तबके की सेवा करनी चाहिए”।
हालांकि संस्थान के डायरेक्टर लक्ष्मीधर बेहरा ने पोस्टर की निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि इसे आईआईटी मंडी ने द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है और संस्थान द्वारा इस मामले की जांच करवाई जा रही है।
IIT मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभव पांडे ने कहा, “जिस इवेंट में पोस्टर लगाया गया था, उसे आधिकारिक तौर पर IIT मंडी ने आयोजित नहीं किया था। हो सकता है कि इसे जन्माष्टमी के मौके पर किसी छात्र समूह ने लगाया हो। संस्थान ने न तो इस समारोह का समर्थन किया और न ही इसमें कोई योगदान दिया। हम निश्चित रूप से इस मामले की जांच करेंगे।”

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