GNDU में डच विशेषज्ञ मिक वालविस्च ने विद्यार्थियों से की उद्यमिता के भविष्य पर चर्चा

अमृतसर : GNDU (गुरु नानक देव विश्वविद्यालय) के उप-कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के नेतृत्व में गोल्डन जुबली सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन द्वारा डच उद्यमिता एवं नवाचार विशेषज्ञ मिक वालविस्च के साथ ‘उद्यमिता : भविष्य आज ही है’ विषय पर एक संवाद सत्र आयोजित किया गया। श्री अमृतसर साहिब की 450वीं वर्षगांठ को समर्पित इस कार्यक्रम में उद्यमिता की व्यावहारिक शिक्षा, नवाचार के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करने और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
भारत में छह सप्ताह बिताने के बाद मिक वालविस्च एक बार फिर GNDU (गुरु नानक देव विश्वविद्यालय) पहुंचे। विश्वविद्यालय के साथ उनका संबंध पिछले दौरों, ज्ञान के आदान-प्रदान और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार मजबूत हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने सेंटर की समन्वयक एवं मानव आनुवंशिकी की प्रोफेसर प्रो. डॉ. वसुधा सांबियाल से मुलाकात की। यह सत्र उनके और डॉ. राजदीप सिंह सोहल के सहयोग से आयोजित किया गया।
कारोबारी विकास, मार्गदर्शन, नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने और प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए मिक वालविस्च ने कहा कि उद्यमिता की शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने, विचारों को व्यवहार में परखने और बाजार की जरूरतों को पहचानने से विद्यार्थियों में अपना उद्यम शुरू करने के लिए आत्मविश्वास और आवश्यक कौशल विकसित किए जा सकते हैं। इससे नए कारोबार स्थापित करने, रोजगार पैदा करने और समावेशी आर्थिक विकास में योगदान देने के अवसर बढ़ते हैं।
मिक वालविस्च ने कहा, “उद्यमिता केवल कंपनी शुरू करने का नाम नहीं है। इसका अर्थ अवसरों की पहचान करना, समस्याओं का समाधान खोजना और समाज के लिए उपयोगी मूल्य का सृजन करना है। पंजाब और भारत में उद्यमशील प्रतिभा को नवाचार, टिकाऊ कारोबार और रोजगार के अवसरों में बदलने की अपार संभावनाएं हैं।”
GNDU (गुरु नानक देव विश्वविद्यालय) के पिछले दौरों के दौरान मिक वालविस्च ने उद्यमिता बूटकैंप, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण सत्र और क्षमता विकास से जुड़ी पहलों में योगदान दिया है। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अपना कारोबार शुरू करने के इच्छुक लोगों ने भाग लिया था।
उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ अपने संबंधों को पेशेवर होने के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा सहयोग, नए विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए दिखाई जाने वाली तत्परता सराहनीय है।
विचार-विमर्श के दौरान भविष्य में उद्यमिता बूटकैंप आयोजित करने, मार्गदर्शन प्रदान करने, प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और व्यावहारिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने जैसी पहलों पर सहयोग की संभावनाएं तलाशी गईं।
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