शामलात जमीन के अधिकार मांगने पर दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार, सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे: परमजीत कैंथ


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नाभा : आजादी के 79 वर्ष बाद भी दलित परिवारों को अपनी जमीन एवं संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नाभा विधानसभा क्षेत्र के गांव चट्ठे में दलित परिवारों के कथित सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्कार, शामलात जमीन के अधिकारों से वंचित रखने तथा पंचायती जमीन पर अवैध कब्जों के मामले को गंभीर बताते हुए भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि उन्हें हरमीत सिंह द्वारा उपायुक्त पटियाला को भेजी गई लिखित शिकायत प्राप्त हुई है।

गांव के दौरे उपरांत परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि गांव की लगभग 115 एकड़ पंचायत शामलात जमीन में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित एक-तिहाई हिस्से पर अपने कानूनी अधिकार प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे दलित परिवारों का कथित रूप से अघोषित सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को अपने पशुओं के लिए चारा तक नहीं दिया जा रहा तथा आसपास के गांवों के लोगों को भी उन्हें खेती के लिए जमीन ठेके पर देने से रोका जा रहा है। यह स्थिति मानवाधिकारों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का गंभीर उल्लंघन है।

कैंथ ने कहा कि पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 तथा सरकारी नीतियों के अनुसार पंचायत की शामलात जमीन का एक-तिहाई हिस्सा अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है। इसके बावजूद दलित परिवारों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित रखना तथा सामाजिक रूप से अलग-थलग करना कानून की भावना और संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है।

कैंथ ने बताया कि लंबे कानूनी संघर्ष के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के उप निदेशक द्वारा 11 अप्रैल 2025 को जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि विवादित भूमि शामलात देह है तथा ग्राम पंचायत चट्ठे की संपत्ति है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि चकबंदी अधिकारियों द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णय कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं। इसके बावजूद जमीन से अवैध कब्जे न हटना प्रशासनिक विफलता और लापरवाही को दर्शाता है।

परमजीत सिंह कैंथ और हरमीत सिंह ने आरोप लगाया कि जिला स्तर के संबंधित अधिकारियों, विशेषकर जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) पटियाला महिंदरजीत सिंह से बार-बार संपर्क करने के बावजूद मामले को लगातार टाला जा रहा है, जिससे कब्जाधारियों के हौसले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल अनुसूचित जाति समुदाय के साथ अन्याय है, बल्कि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और गांव में कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित करने वाला मामला भी है।

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कैंथ ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17, 21 और 46 प्रत्येक नागरिक को समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय का अधिकार प्रदान करते हैं। किसी भी अनुसूचित जाति परिवार का सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करना न केवल संविधान की भावना के विरुद्ध है, बल्कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत भी एक गंभीर अपराध है।

उन्होंने उपायुक्त पटियाला से मांग की कि मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी या ड्यूटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से समयबद्ध जांच करवाई जाए, सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, पंचायत भूमि से अवैध कब्जे तत्काल हटाए जाएं तथा प्रभावित परिवारों के कानूनी एवं संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।

परमजीत सिंह कैंथ ने चेतावनी दी कि अनुसूचित जाति समुदाय के किसी भी प्रकार के सामाजिक बहिष्कार, शोषण या अपमान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा तथा प्रभावित परिवार लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय को न्याय दिलाना, कानून के शासन को सुनिश्चित करना तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार और प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिससे किसी भी परिस्थिति में मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। इस अवसर पर हरमीत सिंह, मोहन सिंह, बलविंदर हनी, रणजीत राणा, हरदास सिंह, फकीर सिंह, अमरीक सिंह, बलवीर सिंह, सोनी, भूरा सिंह, करमजीत सिंह, निर्मल सिंह, जसर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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