चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि एसजीपीसी मेंबर और अकाली दल के सीनियर वाइस प्रधान Amarjeet Singh Chawla पर महिला को 8 महीने तक सराय में रखने और उसका शोषण करने के बहुत गंभीर आरोप हैं मगर इस बेहद गंभीर मामले पर एसजीपीसी और अकाली दल (बादल) की लीडरशिप की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में देश-विदेश में रहने वाले सभी पंजाबियों और गुरु नानक का नाम लेने वालों से सच क्यों छिपाया जा रहा है?
शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बलतेज पन्नू ने बताया कि इस केस में न सिर्फ वित्तीय हेराफेरी हुई है, बल्कि पार्टी के अलग-अलग पदाधिकारियों से भी पैसे इकट्ठा किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि धामी साहब अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बताने से क्यों बचते रहे कि असल में कितना पैसा ट्रांसफर हुआ, यह पैसा कहां से आया, किसे दिया गया और इसका हिसाब-किताब क्या है?
विरसा सिंह वल्टोहा और केस से जुड़ी महिला के एक ऑडियो क्लिप का ज़िक्र करते हुए पन्नू ने कहा कि विरसा सिंह वल्टोहा और शिकायत करने वाली बीबी के बीच हुई बातचीत से कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी मेंबर और अकाली दल के सीनियर वाइस प्रधान अमरजीत सिंह चावला पर महिला को 8 महीने तक सराय में रखने और उसका शोषण करने के बहुत गंभीर आरोप हैं। एसजीपीसी के नियमों को तोड़ते हुए एक अकेली महिला को इतने महीनों तक सराय में कमरा कैसे मिला? क्या उस पवित्र धार्मिक जगह पर ऐसे कामों की इजाज़त दी जा सकती है?
वल्टोहा पर निशाना साधते हुए पन्नू ने कहा कि जो नेता सोशल मीडिया और चैनलों पर पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं और उसे ‘सती-सावित्री’ न होने का ताना मारकर पर्चा भरने की बात कर रहे हैं, उन्हें जवाब देना चाहिए कि जब उन्हें सब पता था तो महिला को वहां क्यों लाया और रखा गया? झिंजर की क्या मजबूरी थी और किसके ऑर्डर पर उसे टिकट मिला?
बलतेज पन्नू ने सुखबीर सिंह बादल को एसजीपीसी का ‘चीफ कस्टोडियन’ बताते हुए चेतावनी दी कि यह मामला चार-पांच दिन इंतजार करने या मामले को दबाने की कोशिश करने से खत्म नहीं होने वाला है। आज दुनिया भर के सिख बुद्धिजीवी और युवा सिख समज सवाल पूछ रहे हैं।
हरजिंदर सिंह धामी को चेतावनी देते हुए पन्नू ने कहा कि धामी साहिब, आपके पास जो बड़ा बैग है, उसे खोलकर देखिए। उसमें घोटालों और कामों की पूरी लिस्ट है। अगर वे चीजें बाहर आ गईं, तो आप कहेंगे कि संस्थाओं को बदनाम किया जा रहा है।